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मिनाब स्कूल हमला: सफेद कफन में लिपटीं 165 बच्चियां, रो पड़ा पूरा ईरान!

Minab, (Iran): ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच जारी युद्ध अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां से वापसी का रास्ता सिर्फ तबाही की ओर जाता है। 28 फरवरी को दक्षिणी प्रांत होर्मोजगान के मिनाब शहर में जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया

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Minab, (Iran): ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच जारी युद्ध अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां से वापसी का रास्ता सिर्फ तबाही की ओर जाता है। 28 फरवरी को दक्षिणी प्रांत होर्मोजगान के मिनाब शहर में जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। एक प्राइमरी स्कूल, जहां बच्चों की खिलखिलाहट गूंजनी चाहिए थी, वहां आज सिर्फ चीखें और मलबे का ढेर बचा है।

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मंगलवार, 3 मार्च 2026 को मिनाब की सड़कों पर जब 165 छात्राओं के जनाजे एक साथ निकले, तो लगा जैसे पूरा शहर ही थम गया हो। कतार में रखे गए इन छोटे-छोटे ताबूतों की वायरल तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर लोगों का कलेजा चीर दिया है। स्थानीय रिपोर्टर के अनुसार, इस हमले में जान गंवाने वाली अधिकांश बच्चियां प्राथमिक कक्षा की छात्राएं थीं, जिन्हें यह भी नहीं पता था कि सरहदों पर छिड़ी यह जंग उनकी जिंदगी छीन लेगी।

खामेनेई की मौत के बाद भड़की आग रिपोर्ट्स के मुताबिक, इज़राइल और अमेरिका के संयुक्त ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ के दौरान हुए इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो गई है। इसके बाद से ही दोनों पक्षों के बीच भीषण गोलाबारी जारी है। लेकिन मिनाब के ‘शजरेह तैयबा’ स्कूल पर हुआ यह हमला इस युद्ध का सबसे दर्दनाक मंजर बन गया है। बचाव दल ने घंटों तक मलबे से उन नन्हीं लाशों को निकाला, जिनके हाथों में अभी भी स्कूल बैग और किताबें दबी हुई थीं।

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मातम में डूबा शहर, काली पट्टी बांध जताया विरोध जनाजे के दौरान मिनाब के मुख्य मैदान में हजारों की भीड़ उमड़ी। शहर के बाजार पूरी तरह बंद रहे और लोगों ने अपनी बांहों पर काली पट्टियां बांधकर इस “युद्ध अपराध” के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। कई देशों और यूनेस्को (UNESCO) ने भी शिक्षण संस्थानों पर हुए इस हमले की कड़ी निंदा की है। फिलहाल, सुरक्षा कारणों से इलाके के सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया है, लेकिन उन मांओं की कोख कभी नहीं भरेगी जिनके बच्चे अब केवल तस्वीरों में जिंदा हैं।

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