Patna: बिहार में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण स्तर को सुधारने के लिए राष्ट्रीय पोषण माह अभियान पूरे जोर-शोर से शुरू हो गया है। 9 सितंबर से शुरू हुआ यह अभियान 8 अक्टूबर तक चलेगा। इस वर्ष अभियान की थीम ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ तय की गई है। राज्य के सभी 38 जिलों में फैले 1,17,672 आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए इस कार्यक्रम को जन-आंदोलन का रूप दिया जा रहा है, ताकि पोषण का दायरा सिर्फ सरकारी कागजों तक सीमित न रहकर सीधे परिवारों के दैनिक जीवन से जुड़ सके।
रोजाना कम से कम पांच गतिविधियां अनिवार्य
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तय कैलेंडर के तहत प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर हर दिन न्यूनतम पांच गतिविधियों का आयोजन अनिवार्य किया गया है। स्थानीय जरूरतों के आधार पर बाल विकास परियोजनाएं अतिरिक्त कार्यक्रम भी जोड़ सकती हैं। इन सभी आयोजनों और उनकी उपलब्धियों का दैनिक रिकॉर्ड केंद्र सरकार के जन-आंदोलन डैशबोर्ड पर ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा है।
पांच प्रमुख विषयों पर केंद्रित है पूरा कार्यक्रम
इस पूरे अभियान को पांच मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित रखा गया है। इनमें भोजन में विविधता व पर्याप्त प्रोटीन, केंद्रों पर ताजा एवं गर्म पका भोजन (HCM), सामुदायिक जवाबदेही, प्रारंभिक बाल विकास और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के तहत मिलने वाले लाभ शामिल हैं। इसके अलावा ग्रामीण स्तर पर जीविका स्वयं सहायता समूहों की मदद से पोषण रैलियां, प्रभातफेरी और पोषण वाटिका का निर्माण कराया जा रहा है, जहां मोटे अनाज के उपयोग, एनीमिया की रोकथाम और स्तनपान को लेकर माताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
खान-पान की आदतों में स्थायी बदलाव का लक्ष्य
समाज कल्याण विभाग के अनुसार, इस अभियान का मकसद सिर्फ एक महीने तक औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि परिवारों के खान-पान के तौर-तरीकों में स्थायी बदलाव लाना है। बच्चों की नियमित वृद्धि निगरानी, साफ-सफाई और संतुलित आहार के जरिए कुपोषण पर लगाम लगाने की रणनीति बनाई गई है।




