Bokaro news: बहुमुखी प्रतिभा के धनी, प्रखर समाजसेवी, साहित्यकार, पत्रकार, विश्व साइकिल पर्यटक, स्वतंत्रता सेनानी एवं चास-बोकारो जायसवाल समाज के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय मिश्रीलाल जायसवाल का व्यक्तित्व एवं कृतित्व भारतीय समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, समाजसेवा तथा महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, दया, क्षमा और मानवता के संदेश के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। जायसवाल समाज (सर्ववर्गीय)बोकारो के अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल ने जन्म दिवस पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि
स्वर्गीय मिश्रीलाल जायसवाल का जन्म 1 जुलाई 1922 को उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद में हुआ। बाल्यावस्था में ही पिता का साया उठ जाने के बाद उनकी प्रारंभिक शिक्षा ननिहाल, महाराजगंज (वाराणसी) में हुई। युवावस्था में वे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी पुस्तक “अंग्रेजों भारत छोड़ो” को तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने जब्त कर लिया था, जो बाद में उन्हें सम्मानपूर्वक वापस की गई।

स्वतंत्रता के उपरांत उन्हें बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह द्वारा शिक्षा विभाग में महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया। राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रति उनके समर्पण के परिणामस्वरूप उन्होंने लगभग 302 हिंदी विद्यालयों की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

सरकारी सेवा का त्याग कर उन्होंने 4 अप्रैल 1952 को महात्मा गांधी के सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार के लिए अपनी ऐतिहासिक विश्व साइकिल यात्रा प्रारंभ की। लगभग 16 वर्षों तक चले इस अभियान में उन्होंने 167 देशों का भ्रमण कर विश्व पटल पर भारत की संस्कृति, गांधीवादी विचारधारा और मानवता का संदेश पहुँचाया। उन्होंने 121 देशों में लगभग 1,78,000 मील साइकिल से तथा 78,000 मील जल एवं वायु मार्ग से यात्रा कर एक अनूठा इतिहास रचा।

1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान उन्होंने अपने 13 स्वर्ण पदक तथा लगभग 1,26,000 रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा राष्ट्र रक्षा हेतु समर्पित कर अद्वितीय देशभक्ति का परिचय दिया।

वे जाति, धर्म, ऊँच-नीच, अमीरी-गरीबी के भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता की सेवा में विश्वास रखते थे। उनका संपूर्ण जीवन त्याग, सादगी, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण रहा।

11 मई 1998, बुद्ध पूर्णिमा के पावन दिवस पर इस महान विभूति का महाप्रयाण हुआ, किंतु उनके आदर्श, विचार और सेवाएँ आज भी समाज को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।

चास-बोकारो जायसवाल समाज उनकी 104वीं जयंती के पावन अवसर पर अपने संस्थापक अध्यक्ष, महान स्वतंत्रता सेनानी एवं विश्व साइकिल पर्यटक स्वर्गीय मिश्रीलाल जायसवाल को भावभीनी श्रद्धांजलि एवं शत्-शत् नमन अर्पित करता है तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराता है।

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