रांची: झारखंड उच्च न्यायालय में मंगलवार को वर्ष 2016 की स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़े मीना कुमारी मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से दायर अपील (LPA) पर सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को प्रतिवादियों को याचिका की कॉपी सौंपने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तिथि निर्धारित की है।

अदालत ने राज्य सरकार और जेएसएससी को सख्त हिदायत दी है कि यदि वे अपनी संशोधन याचिका (Amendment Petition) में किसी भी प्रकार की त्रुटि को सुधारना चाहते हैं, तो उसे आगामी 7 जुलाई तक अनिवार्य रूप से दूर कर लें।

क्या है सरकार की आपत्ति?

राज्य सरकार ने अपनी संशोधन याचिका में दलील दी है कि जब इस मामले से जुड़ी मुख्य अपील पर हाईकोर्ट की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) में सुनवाई पहले से ही लंबित है, तो ऐसे में एकल पीठ (सिंगल बेंच) द्वारा मूल आदेश में संशोधन करना और समानांतर कार्यवाही चलाना उचित नहीं है। दरअसल, एकल पीठ ने आदेश में संशोधन कर जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की अध्यक्षता में ‘वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन’ का गठन किया था, जिसने डोरंडा स्थित पुरानी हाईकोर्ट बिल्डिंग में मामले की जांच और सुनवाई भी शुरू कर दी है। सरकार का तर्क है कि दो अलग-अलग स्तरों पर एक साथ समानांतर सुनवाई नहीं की जा सकती, इसलिए एकल पीठ के उस आदेश पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए।

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