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इंफ्रास्ट्रक्चर का महाप्लान: 17 लाख करोड़ से बदलेगी देश की तस्वीर!

India News: देश में सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा खाका तैयार कर लिया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, आने वाले वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर करीब 17 लाख करोड़ रुपये खर्च किए

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India News: देश में सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा खाका तैयार कर लिया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, आने वाले वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर करीब 17 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत केंद्रीय अवसंरचना मंत्रालयों और राज्यों के अंतर्गत कुल 852 परियोजनाओं की तीन वर्षीय सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी पाइपलाइन बनाई गई है। इन परियोजनाओं पर अनुमानित लागत 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगी, जिससे देश में विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने बताया कि यह पहल केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई घोषणा को अमल में लाने के लिए की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 से शुरू होने वाली इस तीन साल की पीपीपी पाइपलाइन का उद्देश्य संभावित परियोजनाओं की पहले से जानकारी उपलब्ध कराना है। इससे निवेशकों, डेवलपर कंपनियों और अन्य हितधारकों को दीर्घकालिक योजना बनाने और सोच-समझकर निवेश निर्णय लेने में सुविधा मिलेगी। मंत्रालय के मुताबिक, इस पाइपलाइन में परियोजनाओं की संख्या के साथ-साथ उनके अनुमानित खर्च का भी खाका पेश किया गया है।

पीपीपी मॉडल की क्या होगी भूमिका?

सरकार द्वारा साझा किए गए विवरण के अनुसार, केंद्रीय अवसंरचना मंत्रालयों की ओर से 232 पीपीपी परियोजनाएं शुरू की जाएंगी, जिन पर करीब 13.15 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं, 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्तर पर 620 परियोजनाएं लागू की जाएंगी, जिनकी कुल लागत 3.84 लाख करोड़ रुपये बताई गई है। इसका साफ मतलब है कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में पीपीपी मॉडल की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है और निजी क्षेत्र को बड़े पैमाने पर निवेश के अवसर मिलेंगे।

क्षेत्रवार बात करें तो सबसे अधिक निवेश सड़क परिवहन और राजमार्ग सेक्टर में किया जाएगा। वित्त मंत्रालय के अनुसार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 108 परियोजनाएं इस पाइपलाइन में शामिल हैं, जिनका कुल बजट 8.76 लाख करोड़ रुपये है। इसके बाद बिजली मंत्रालय की 46 परियोजनाएं हैं, जिन पर 3.4 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। रेल मंत्रालय की 13 परियोजनाओं के लिए भी 30,904 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे स्पष्ट है कि सड़क और ऊर्जा क्षेत्र सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर हैं।

अन्य क्षेत्रों में भी बड़े निवेश की योजना है। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग की 29 परियोजनाओं पर 12,254 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की परियोजनाओं पर 8,743 करोड़ रुपये, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग की दो परियोजनाओं पर 6,646 करोड़ रुपये और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की 11 परियोजनाओं पर 2,262 करोड़ रुपये का अनुमानित व्यय रखा गया है। राज्यों के लिहाज से देखें तो आंध्र प्रदेश को सबसे ज्यादा परियोजनाएं मिली हैं।

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राज्य में 270 पीपीपी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिन पर करीब 1.16 लाख करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। इसके बाद तमिलनाडु का स्थान है, जहां 70 परियोजनाओं पर 87,640 करोड़ रुपये का अनुमानित निवेश किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अमरावती शहर के विकास में केंद्र सरकार की भागीदारी के कारण आंध्र प्रदेश को विशेष प्राथमिकता दी गई है। कुल मिलाकर यह योजना देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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