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अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, कांधे पर उठा शहर का चहेता बेटा रमजान

Ranchi News : रांची के सामाजिक और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के प्रमुख स्तंभ, प्रसिद्ध समाजसेवी रमजान कुरैशी को रविवार को मणिटोला कब्रिस्तान, डोरंडा में हजारों लोगों की मौजूदगी में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उनके अंतिम सफर में हर वर्ग के लोग शामिल हुए, जो इस

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Ranchi News : रांची के सामाजिक और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के प्रमुख स्तंभ, प्रसिद्ध समाजसेवी रमजान कुरैशी को रविवार को मणिटोला कब्रिस्तान, डोरंडा में हजारों लोगों की मौजूदगी में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उनके अंतिम सफर में हर वर्ग के लोग शामिल हुए, जो इस बात का प्रमाण था कि वे कितने लोगों के दिलों में बसते थे और उनकी सेवाओं ने कितनों को छुआ था।

शनिवार का दिन रांची के लिए बेहद दुखद रहा। कांटाटोली में जमीयतुल कुरैशी 84 पंचायत चुनाव की सभा को रमजान कुरैशी संबोधित कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उनका भाषण शुरू ही हुआ था कि अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वे मंच पर ही गिर पड़े।

मौके पर अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी मौत का कारण हृदय गति रुकना था। इस अचानक घटना ने सभा में मौजूद सभी लोगों को स्तब्ध कर दिया और कुछ ही देर में यह खबर पूरे शहर में फैल गई।

रमजान कुरैशी फाईल फोटो

रविवार को उनके जनाजे में लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। हर कोई अपने तरीके से उन्हें अंतिम विदाई देने आया। बुजुर्ग से लेकर युवा सभी की आंखों में आंसू थे। उनके जनाजे को कांधे पर उठाने के लिए इतनी भीड़ थी कि रास्ता छोटा पड़ गया। यह दृश्य अपने आप में इस बात का सबूत था कि रमजान कुरैशी सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि इंसानियत की मिसाल थे।

पिछले दो दशकों से रमजान कुरैशी स्वास्थ्य और समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय थे। वे हमेशा गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों के लिए खड़े रहे। चाहे किसी को इलाज के लिए आर्थिक मदद की जरूरत हो या किसी परिवार को संकट की घड़ी में सहारा, रमजान कुरैशी का दरवाजा हमेशा खुला रहता था। उनकी मदद के लिए किसी को अपॉइंटमेंट या औपचारिकता की जरूरत नहीं होती थी।

जो लोग उन्हें करीब से जानते थे, उनका कहना है कि रमजान कुरैशी का स्वभाव बेहद विनम्र और अपनापन भरा था। वे बिना भेदभाव के हर वर्ग और समुदाय के लोगों से जुड़ते थे। उनका जीवन इस बात का प्रमाण था कि समाज की सच्ची सेवा वही है, जिसमें बदले में कुछ पाने की अपेक्षा न हो।

उनका घर अक्सर जरूरतमंदों के लिए मदद का केंद्र बना रहता था। वहां से कई बार गरीब मरीजों के लिए दवाइयां और सहायता दी जाती थी। उनके सहयोग से कई मरीजों की जिंदगी बची।

उनके निधन से रांची के सामाजिक जगत में गहरा खालीपन पैदा हो गया है। शहर के कई चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी और सामाजिक कार्यकर्ता उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। सभी की आंखें नम थीं, क्योंकि वे जानते थे कि रमजान कुरैशी का जाना सिर्फ एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि एक युग का अंत है।

समाज में उनका योगदान और लोगों के प्रति उनका प्रेम हमेशा याद किया जाएगा। उनकी मिसाल आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाती रहेगी कि सच्चा समाजसेवी वही है जो बिना थके, बिना रुके और बिना किसी भेदभाव के लोगों के लिए काम करे। रमजान कुरैशी भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें और उनके काम हमेशा जीवित रहेंगे।

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