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राम शलाका से हनुमान चक्र तक, जानें कैसे पूछे जाते हैं जीवन के सवाल

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प्रश्नावली चक्र क्या हैं?

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Spirituality Desk: हिंदू धर्म के अनेक ग्रंथों में अलग-अलग प्रश्नावली चक्र और यंत्रों का उल्लेख मिलता है। इनमें श्री राम शलाका प्रश्नावली, हनुमान प्रश्नावली चक्र, नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र और श्रीगणेश प्रश्नावली चक्र प्रमुख हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इनका उपयोग मन में उठ रहे सवालों और जीवन की कठिनाइयों से जुड़े जवाब जानने के लिए किया जाता है।

मान्यता है कि इन प्रश्नावली चक्रों और यंत्रों की सहायता से लोग अपने सवालों का समाधान जानने की कोशिश करते हैं। आम लोगों के अलावा ज्योतिष और पुरोहित भी इनका उपयोग फलादेश के लिए करते हैं।

श्री राम शलाका प्रश्नावली

श्री राम शलाका प्रश्नावली का उल्लेख गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस में मिलता है। यह राम भक्ति पर आधारित है और इसके माध्यम से लोग जीवन से जुड़े कई सवालों का जवाब जानने का प्रयास करते हैं।

इसके प्रयोग को लेकर मान्यता है कि सबसे पहले भगवान श्रीराम का स्मरण करते हुए मन में अपने सवाल के बारे में अच्छी तरह सोच लिया जाता है। इसके बाद आंखें बंद करके शलाका चार्ट पर दिए गए किसी एक अक्षर पर उंगली रखी जाती है।

जिस अक्षर पर उंगली रुकती है, वहां से प्रत्येक 9वें अक्षर को जोड़कर एक चौपाई बनती है। इसी चौपाई को प्रश्नकर्ता के सवाल का उत्तर माना जाता है।

हनुमान प्रश्नावली चक्र

मान्यता है कि हनुमानजी उच्च कोटि के ज्योतिषी भी थे। इसका कारण उनके शिव के ग्यारहवें अंशावतार होने से जोड़ा जाता है, जिनसे ज्योतिष विद्या की उत्पत्ति मानी गई है।

कहा जाता है कि हनुमानजी ने ज्योतिष प्रश्नावली के 40 चक्र बनाए हैं। इसके प्रयोग में प्रश्नकर्ता आंखें बंद करके चक्र के किसी नाम पर उंगली रखता है। यदि उंगली किसी लाइन पर रुक जाए तो दोबारा उंगली रखी जाती है।

इसके बाद जिस नाम पर उंगली रुकती है, उसके अनुसार शुभ-अशुभ फल का निराकरण किया जाता है। मान्यता है कि रामायण काल के परम दुर्लभ यंत्रों में हनुमान चक्र श्रेष्ठ यंत्रों में माना जाता है।

नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र

देवी दुर्गा के कई भक्त नवदुर्गा प्रश्नावली चक्र को चमत्कारिक मानते हैं। मान्यता है कि इसके माध्यम से जीवन की परेशानियों और मन में उठने वाले सवालों का संतोषजनक हल जानने का प्रयास किया जा सकता है।

इसके प्रयोग से पहले पांच बार ‘ऊँ ऐं ह्लीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र का जप किया जाता है। इसके बाद एक बार ‘या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:’ मंत्र का जप करने की मान्यता है।

इसके बाद आंखें बंद कर सवाल पूछा जाता है और देवी दुर्गा का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र पर उंगली घुमाकर रोक दी जाती है। जिस कोष्ठक पर उंगली रुकती है, उसमें लिखे अंक के अनुसार फलादेश जाना जाता है।

श्रीगणेश और शिव प्रश्नावली यंत्र

हिंदू मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश प्रथमपूज्य हैं और मांगलिक कार्यों में सबसे पहले उनकी पूजा की जाती है। श्रीगणेश प्रश्नावली यंत्र के माध्यम से भी लोग जीवन की परेशानियों और सवालों का हल जानने का प्रयास करते हैं।

इसके प्रयोग में पहले पांच बार ‘ऊँ नम: शिवाय:’ और फिर 11 बार ‘ऊँ गं गणपतयै नम:’ मंत्र का जप किया जाता है। इसके बाद आंखें बंद करके मन में सवाल रखते हुए भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है और प्रश्नावली चक्र पर उंगली घुमाकर रोक दी जाती है। जिस कोष्ठक पर उंगली रुकती है, उसमें लिखे अंक के अनुसार फलादेश जाना जाता है।

शिव प्रश्नावली यंत्र में भगवान शिव के चित्र पर 1 से 7 तक अंक दिए होते हैं। श्रद्धालु आंखें बंद करके आस्था और भक्ति के साथ शिवजी का ध्यान करते हैं और मन ही मन ‘ऊं नम: शिवाय:’ मंत्र का जाप करते हुए शिव यंत्र पर उंगली घुमाकर रोक देते हैं।

जिस कोष्ठक पर उंगली रुकती है, उसमें दिए अंक के आधार पर फलादेश जाना जाता है। इन प्रश्नावलियों और यंत्रों के अलावा कई लोग अपने मन में उठ रहे सवालों के जवाब पाने के लिए साईं प्रश्नावली का भी उपयोग करते हैं।

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