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फर्जी टोल घोटाला: सिर्फ 5% सरकारी फंड में, बाकी 95% हजम! 14 ठिकानों पर ED की रेड

फर्जी टोल वसूली और NHAI के पायरेटेड सॉफ्टवेयर घोटाले में ईडी ने यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान समेत देश भर के 14 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है।

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Lucknow: राष्ट्रीय राजमार्गों पर फर्जी और पायरेटेड सॉफ्टवेयर के जरिए अवैध टोल वसूली करने वाले एक बड़े संगठित सिंडिकेट के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देशव्यापी कार्रवाई शुरू की है। जांच एजेंसी ने बुधवार सुबह से ही उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में लगभग 14 ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के मुख्य सर्वर के समानांतर फर्जी सॉफ्टवेयर बनाकर की जा रही अवैध वसूली और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है।

सिर्फ 5% सरकारी खाते में, 95% राशि का होता था गबन

इस पूरे गोरखधंधे की परतें सबसे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) की जांच में खुली थीं। एसटीएफ की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि टोल प्लाजा पर की जाने वाली कुल वसूली का मात्र 5 प्रतिशत हिस्सा ही आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता था, जबकि शेष 95 प्रतिशत भारी-भरकम राशि को सिंडिकेट के लोग डकार जाते थे। आरोपी गिरोह एनएचएआई के ऑटोमेटेड सिस्टम को बायपास कर फर्जी फास्टैग और क्लोन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता था। इसके जरिए ओवरलोडेड और भारी वाणिज्यिक वाहनों को गैरकानूनी तरीके से निकाला जाता था, जिससे सरकार को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।

देशभर के 14 ठिकानों पर सघन सर्च ऑपरेशन

प्रवर्तन निदेशालय अब धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत इस पूरे सिंडिकेट के अंतिम लाभार्थियों (End Beneficiaries) और मनी ट्रेल को खंगालने में जुटा है। इस सिलसिले में उत्तर प्रदेश के वाराणसी के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) और कोलकाता स्थित कई परिसरों पर एक साथ सघन तलाशी ली जा रही है।

डिजिटल रिकॉर्ड्स और बेनामी संपत्तियों की पड़ताल

छापेमारी के दौरान जांच अधिकारियों द्वारा आईटी उपकरणों, सर्वर लॉग्स, डिजिटल रिकॉर्ड्स, बैंक खातों और संदिग्ध बेनामी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच में आरोप सामने आया है कि अवैध वसूली से जुटाई गई काली कमाई को टोल संचालकों, सॉफ्टवेयर हैकर्स/आईटी कर्मियों और अन्य बिचौलियों के बीच सुनियोजित तरीके से बांटा जाता था।

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