New Delhi: चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था ने वैश्विक संकटों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए 7.8 प्रतिशत की मजबूत आर्थिक विकास दर (GDP Growth) दर्ज की है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक से जारी एक विशेष वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि का श्रेय देश की 140 करोड़ जनता के सामूहिक प्रयासों और प्रतिबद्धता को दिया। इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक मजबूती और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए देशवासियों से ‘स्वदेशी’ अपनाने और गैर-जरूरी विदेशी खर्चों से बचने की पुरजोर अपील की।
गैर-जरूरी सोना और विदेश यात्रा से बचने का आग्रह
प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से आग्रह किया कि जब तक अत्यंत आवश्यक न हो, तब तक वे सोना खरीदने, विदेश घूमने जाने और विदेशों में शादी समारोह आयोजित करने (Destination Weddings Abroad) से परहेज करें। इस संदर्भ में अमेरिका के एक कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी स्पष्ट किया कि भारत कच्चे तेल और उर्वरकों का एक बड़ा आयातक है। ऐसे में वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी मुद्रा के अनावश्यक खर्च को घटाना राष्ट्रीय हित में बेहद जरूरी है।
‘निराशावाद के विमर्श’ पर पीएम का तंज
प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए ‘झूठ की गूंज’ फैलाने वालों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पहली तिमाही के 7.8% के विकास आंकड़ों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर फैलाए जा रहे निराशावाद के तमाम दावों को खारिज कर दिया है। पीएम ने कहा कि दुनिया इस समय युद्ध, भू-राजनीतिक अस्थिरता और सप्लाई चेन की गंभीर रुकावटों से जूझ रही है। 2020 के कोरोना संकट के बाद से ही वैश्विक स्तर पर अस्थिरता का माहौल है, लेकिन इसके बावजूद भारत का बढ़ता आर्थिक आत्मविश्वास 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प को नई ऊर्जा दे रहा है।
कांग्रेस ने आंकड़ों को बताया ‘बाजीगरी’
दूसरी तरफ, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जीडीपी के इन ताजा आंकड़ों पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे ‘आंकड़ों की कलाबाजी’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने गणना की पद्धति में बदलाव करके यह आंकड़े पेश किए हैं। जयराम रमेश के अनुसार, नॉमिनल और वास्तविक जीडीपी के बीच का अंतर केवल 2.3 प्रतिशत दिखाया गया है, जबकि जून तिमाही में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति 9 प्रतिशत से अधिक रही है। उन्होंने दावा किया कि जीडीपी अनुमान के समय थोक मूल्य सूचकांक को नजरअंदाज करना आंकड़ों की एक स्पष्ट विसंगति को दर्शाता है।





