पटना : सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी और जरूरत से ज्यादा स्टॉक की समस्या को दूर करने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। अब प्रखंड, जिला और राज्य स्तर पर दवाओं और अन्य जरूरी चिकित्सा सामग्री की मांग की समीक्षा की जाएगी।
राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार ने इसके लिए इंडेंट रिव्यू एवं कन्फर्मेशन कमेटी (IRCC) का गठन किया है। इसका उद्देश्य अस्पतालों में दवाओं की वास्तविक जरूरत का सही आकलन करना और मरीजों को समय पर जरूरी दवाएं उपलब्ध कराना है।
मरीजों की संख्या के आधार पर तय होगी मांग
नई व्यवस्था के तहत दवाओं की मांग केवल पुराने उपयोग या मौजूदा स्टॉक के आधार पर तय नहीं होगी। मरीजों की संख्या, ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी में मरीजों का दबाव, मौसमी बीमारियां, स्थानीय स्तर पर बीमारी की स्थिति और उपलब्ध स्टॉक को भी ध्यान में रखा जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि नई व्यवस्था से दवा आपूर्ति प्रणाली अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी। इससे दवाओं की कमी, जरूरत से ज्यादा खरीद और दवाओं के एक्सपायर होने से होने वाली बर्बादी को कम करने में मदद मिलेगी।
हर महीने होगी मांग की समीक्षा
प्रखंड स्तर की कमेटी हर महीने 1 से 10 तारीख के बीच दवाओं की मांग की समीक्षा करेगी। जिला स्तर की कमेटी 11 से 15 तारीख के बीच इसकी जांच करेगी। वहीं, राज्य स्तर पर 15 से 20 तारीख के बीच समीक्षा की जाएगी।
प्रखंड स्तर पर कमेटी की अध्यक्षता चिकित्सा पदाधिकारी प्रभारी और जिला स्तर पर सिविल सर्जन करेंगे। राज्य स्तर पर राज्य स्वास्थ्य समिति और BMSICL के वरिष्ठ अधिकारी समीक्षा प्रक्रिया में शामिल होंगे।
90 दिनों के बफर स्टॉक का ध्यान
दवाओं की मांग तय करते समय 90 दिनों के बफर स्टॉक का भी ध्यान रखा जाएगा। कमेटियां मौजूदा स्टॉक, एक्सपायरी के करीब पहुंच चुकी दवाओं और सप्लाई में मौजूद दवाओं की भी जानकारी लेंगी।
यदि किसी दवा की मांग पिछली तिमाही की औसत खपत की तुलना में करीब 20 से 25 प्रतिशत या उससे अधिक बढ़ती है, तो उसके कारणों की समीक्षा की जाएगी। गलत, जरूरत से ज्यादा या बिना उचित कारण भेजे गए इंडेंट के लिए संबंधित प्रखंड और जिला स्तरीय कमेटियां जवाबदेह होंगी।
नई व्यवस्था के तहत सभी मांगों को डीवीडीएमएस पोर्टल पर दर्ज और सत्यापित किया जाएगा, ताकि दवाओं की खरीद वास्तविक जरूरत के अनुसार हो और मरीजों को समय पर जरूरी दवाएं मिल सकें।




