बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (Birsa Agricultural University), रांची (BAU) के परिसर में चारदीवारी निर्माण कार्य में अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन बेहद गंभीर है।
इस मामले में जांच और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी पूरी जानकारी नीचे दी गई है:
📌 मुख्य आरोप और गड़बड़ी का मामला
- घटिया निर्माण सामग्री: शिकायतकर्ताओं और आंतरिक रिपोर्टों के अनुसार, चारदीवारी के निर्माण में घटिया दर्जे की ईंटों, कम सीमेंट और निम्न गुणवत्ता वाले बालू का उपयोग करने का आरोप है।
- मानकों की अनदेखी: तकनीकी प्राक्कलनों (Technical Specifications) और एस्टीमेट के अनुसार जितनी गहरी नींव और मजबूती होनी चाहिए थी, ठेकेदार द्वारा उसका पालन नहीं किया जा रहा था।
- वित्तीय विसंगतियां: सरकारी और विश्वविद्यालय फंड के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है, क्योंकि जारी किए गए बजट के अनुपात में जमीन पर काम की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई।
🔍 निदेशक स्तर पर जांच और आदेश
- निदेशक प्रशासन की भूमिका: विश्वविद्यालय के निदेशक प्रशासन (Director Administration) को इस पूरे मामले की गहनता से तकनीकी और प्रशासनिक जांच करने का जिम्मा सौंपा गया है।
- साइट का निरीक्षण: जांच टीम को निर्माण स्थल (साइट) पर जाकर ईंटों, सीमेंट के मिश्रण और पूरी संरचना की गुणवत्ता का फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) करने का आदेश दिया गया है।
- जवाबदेही तय करना: निदेशक यह भी जांच करेंगे कि निर्माण के वक्त विश्वविद्यालय के किस इंजीनियरिंग विंग या संबंधित कर्मचारी की निगरानी में यह लापरवाही हुई।
🛠️ आगामी कार्रवाई और कदम
- रिपोर्ट सौंपना: जांच पूरी होने के बाद निदेशक अपनी विस्तृत रिपोर्ट कुलपति (Vice Chancellor) को सौंपेंगे।
- भुगतान पर रोक: गड़बड़ी की पुष्टि होने तक संवेदक (Contractor) के चालू और अंतिम बिलों के भुगतान (Payment) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का नियम है।
- ब्लैकलिस्टिंग की चेतावनी: यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो ठेकेदार की एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने और संबंधित अधिकारियों पर विभागीय व कानूनी कार्रवाई (Departmental Action) की तैयारी है।




