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लोकसंस्कृति का महाकुंभ बना डहरे टुसु, दामोदर तट पर उमड़ा जनसैलाब

Bokaro news:- मकर संक्रांति के पावन अवसर पर तेलमोचो पुल के समीप दामोदर नदी तट पर आस्था, लोकसंस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। बुधवार की सुबह प्रातः छह बजे से दोपहर दो बजे तक लाखों श्रद्धालुओं ने दामोदर नदी में पवित्र स्नान

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Bokaro news:- मकर संक्रांति के पावन अवसर पर तेलमोचो पुल के समीप दामोदर नदी तट पर आस्था, लोकसंस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। बुधवार की सुबह प्रातः छह बजे से दोपहर दो बजे तक लाखों श्रद्धालुओं ने दामोदर नदी में पवित्र स्नान कर दान-पुण्य किया। इस दौरान श्रद्धालुओं का जनसैलाब नदी तट पर उमड़ पड़ा।

मकर संक्रांति को लेकर क्षेत्र में टुसु परब हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सैकड़ों की संख्या में महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार टुसु गीत गाते हुए टोली बनाकर दामोदर नदी पहुंचीं और टुसु का बिसर्जन किया। टुसु गीतों की गूंज से पूरा इलाका गूंजायमान हो उठा। इस अवसर पर परंपरागत टुसु मेला भी लगा, जिसमें भारी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी।

डहरे टुसु महोत्सव में जीवंत हुई कुड़माली लोकसंस्कृति
धन-धान्य की देवी टुसु के सम्मान में आयोजित ऐतिहासिक डहरे टुसु महोत्सव ने पुपुनकी से दामोदर पुल तक पूरे क्षेत्र को लोकसंस्कृति के रंग में रंग दिया। मांदर की थाप, धमसा-नगाड़ों की गूंज, शहनाई की मंगल ध्वनि और “जय गराम” के उद्घोष के बीच हजारों श्रद्धालु सांस्कृतिक शोभायात्रा में शामिल हुए।

यह भव्य शोभायात्रा पुपुनकी से प्रारंभ होकर लगभग दो किलोमीटर दूर दामोदर पुल तक निकाली गई। आकर्षक टुसु चौड़ल, पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएं, अनुशासित पंक्तियों में टुसु प्रतिमा लेकर चलती श्रद्धालु महिलाएं और धमसा की लय पर थिरकते युवा—पूरा दृश्य लोकसंस्कृति के उत्सव में तब्दील हो गया।

परंपरा और संस्कृति से जुड़ा पर्व : दशरथ महतो
इस अवसर पर समाजसेवी दशरथ महतो ने कहा कि “टुसु परब हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह मिट्टी से जुड़ी वर्षों पुरानी परंपरा है, जिसे हमने पीढ़ी दर पीढ़ी संजोकर रखा है।”
शोभायात्रा के समापन के बाद सभी श्रद्धालु दामोदर नदी पहुंचे और टुसु का सामूहिक बिसर्जन कर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

हजारों लोग रहे शामिल
डहरे टुसु परब एवं मकर संक्रांति के इस भव्य आयोजन में पुपुनकी पंचायत की मुखिया प्रिया देवी, संतोष केवट, निमाई महतो सरोज महतो, बिधायक प्रतिनिधि इमरान अंसारी, राजू महतो, जेएलकेएम नेत्री सुनिता देवी, लख्खी केटियार, पूजा देवी, परेश महतो सहित हजारों की संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हुए।

मकर संक्रांति और टुसु परब के इस आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि लोकपर्व केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक पहचान का प्रतीक होते हैं।

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