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Lucknow: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी 8 जुलाई को वाराणसी (काशी) के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे राज्य के शिक्षकों के लिए बहुप्रतीक्षित ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा’ योजना का भव्य शुभारंभ करेंगे। इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के सभी पात्र शिक्षकों के साथ-साथ उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को भी आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर पूरी तरह कैशलेस चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाएगी।
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7.8 लाख से अधिक शिक्षक करा चुके हैं पंजीकरण
गौरतलब है कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने पिछले शिक्षक दिवस पर इस कल्याणकारी योजना की घोषणा की थी। साचीज (SACHIS) की सीईओ अर्चना वर्मा ने योजना के तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस योजना के प्रभावी और पारदर्शी संचालन के लिए पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था को लागू किया गया है। विभाग ने लाभार्थियों का डेटा संकलित करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया है। बेसिक शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अब तक 7,89,032 शिक्षक और उनके परिजन अपना विवरण दर्ज करा चुके हैं।
आधार वेरिफिकेशन के बाद डाउनलोड होगा डिजिटल कार्ड
पोर्टल पर उपलब्ध कराए गए डेटा का सत्यापन पहले खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) करेंगे, जिसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अंतिम मंजूरी देंगे। बीएसए से अनुमोदन मिलने के बाद इस डेटा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के पोर्टल से एकीकृत (लिंक) किया जाएगा। इसके बाद लाभार्थी आधार (Aadhar) आधारित ई-केवाईसी (e-KYC) की प्रक्रिया पूरी कर अपना डिजिटल कार्ड खुद डाउनलोड कर सकेंगे और इस मुफ्त चिकित्सा सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए भी यह डेटा संग्रह पोर्टल 3 जुलाई से लाइव कर दिया गया है। माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के आवेदन का सत्यापन प्रधानाचार्य करेंगे और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) इस पर अंतिम मुहर लगाएंगे।
विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों को भी मिलेगा योजना का लाभ
साचीज सीईओ के मुताबिक, पात्र लाभार्थियों को देश भर के उन सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलेगा, जो आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध हैं। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान शिक्षक परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ में बड़ी कमी आएगी। योगी सरकार ने इस योजना का दायरा और अधिक व्यापक बनाने की तैयारी भी पूरी कर ली है। बहुत जल्द उच्च शिक्षा विभाग के लिए भी अलग पोर्टल खोला जाएगा, जिससे विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के प्रोफेसरों और कर्मचारियों को भी यह बेहतरीन चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।
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