फॉण्ट कनवर्टर NEW

CJI पर जूता उछालने के बाद सीनाजोरी, बोला- फिर ऐसा ही करुंगा

India News: देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई पर सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने वाले वकील राकेश किशोर एक बार फिर विवादित बयान देकर चर्चा में हैं। इस घटना के बाद उन्हें माफ कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने कहा कि अगर “परमात्मा आदेश

अपनी भाषा में पढ़ें

India News: देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई पर सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने वाले वकील राकेश किशोर एक बार फिर विवादित बयान देकर चर्चा में हैं। इस घटना के बाद उन्हें माफ कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने कहा कि अगर “परमात्मा आदेश देंगे, तो वे दोबारा ऐसा ही करेंगे।” किशोर का कहना है कि यह उनका दिव्य कर्तव्य था और उन्हें अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है।

किशोर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में खजुराहो स्थित जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति को पुनर्स्थापित करने की याचिका खारिज करते समय सीजेआई की टिप्पणी से वे आहत हुए, जिसकी वजह से उन्होंने जूता फेंका।

विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक प्रतिक्रिया

मंगलवार को मयूर विहार स्थित किशोर के रिवरव्यू अपार्टमेंट के बाहर घटना के विरोध में प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों के पास जूते की मालाएं, डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें और संविधान की प्रतियां थीं। नारे भी लगे — “सीजेआई का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।” इस प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व विधायक सौरभ भारद्वाज भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जूता फेंकने की घटना नहीं बल्कि संविधान पर हमला है।

सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सीजेआई के खिलाफ जातिवादी टिप्पणियां और धमकियां फैलाई जा रही हैं, जिन्हें सरकार को तुरंत हटाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की मांग की।

पुरानी शिकायतें और विवादित इतिहास

राकेश किशोर के पड़ोसियों ने मीडिया को बताया कि उनके खिलाफ पहले भी हिंसक व्यवहार की शिकायतें दर्ज हैं। 70 वर्षीय पुरुषोत्तम ने कहा कि 2021 में उन्होंने एक बुजुर्ग के साथ हाथापाई की थी। निवासियों ने आरोप लगाया कि वह सोसाइटी के वॉट्सऐप ग्रुप में जातिवादी और धार्मिक गालियां देते थे।

सोसाइटी सुरक्षा गार्डों के अनुसार, उनके परिवार ने निर्देश दिया है कि किसी भी विज़िटर को उनके घर में न आने दिया जाए। परिवार का कहना है कि किशोर की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वह अस्थिर महसूस कर रहे हैं।

यह घटना न केवल न्यायपालिका पर हमले का मामला है बल्कि समाज में बढ़ते असहिष्णुता और कानून की अवहेलना का भी संकेत देती है।

इस खबर को भी पढ़ें: अमेरिका में जज की हत्या के बाद चिंतितों ने कहा- CJI पर जूता फेंकने को हल्के में न लें!

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram