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चीन की महिला ने अपनी ही बेटी की जगह ‘किराए’ पर रखी बेटी? ..जानें वजह

Social News: चीन के हेनान प्रांत से एक ऐसा हैरान कर देने वाला और दुखद मामला सामने आया है, जिसने पूरे चीनी सोशल मीडिया पर एक तीखी बहस छेड़ दी है। मा नामक एक वृद्ध महिला ने अपनी ही दो बेटियों के स्थान पर, अपनी

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Social News: चीन के हेनान प्रांत से एक ऐसा हैरान कर देने वाला और दुखद मामला सामने आया है, जिसने पूरे चीनी सोशल मीडिया पर एक तीखी बहस छेड़ दी है। मा नामक एक वृद्ध महिला ने अपनी ही दो बेटियों के स्थान पर, अपनी देखभाल के लिए एक स्थानीय टीवी कार्यक्रम पर विज्ञापन के जरिए एक लड़की को ‘बेटी’ के रूप में नौकरी पर रखने की पेशकश की है।

विज्ञापन के तहत, मा ने उस लड़की को करीब $420 डॉलर (लगभग ₹35,000) मासिक वेतन और रहने के लिए एक फ्लैट देने का वादा किया है। इसके साथ ही वह इस पूरे समझौते का कानूनी कॉन्ट्रैक्ट करने को भी तैयार हैं।

संपत्ति विवाद और अकेलापन

मा ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि वह अपनी दो बेटियों के बावजूद अकेली हैं। उनकी बड़ी बेटी ने पोती की परवरिश को लेकर हुए विवाद के बाद उनसे सारे संबंध तोड़ लिए। बड़ी बेटी का कहना है कि वह बेरोजगार है और न तो मा की देखभाल कर सकती है, न ही उनसे कोई नाता रखना चाहती है। वहीं, उनकी छोटी बेटी मानसिक रूप से बीमार है और अपनी देखभाल करने में सक्षम नहीं। मा काफी पहले अपने पति से तलाक ले चुकी हैं और अन्य रिश्तेदारों से भी उनका संपर्क धीरे-धीरे समाप्त हो गया।

मा, जो खुद अस्थमा से पीड़ित हैं, को ऐसी लड़की की जरूरत है जो उनकी देखभाल करे, समय पर अस्पताल ले जाए और उन्हें एक बेटी की तरह स्नेह दे।

सोशल मीडिया पर तीखी बहस

इस अनोखे विज्ञापन ने चीनी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा की है। कुछ लोगों ने इसे एक मानवीय परिस्थिति से उपजा दुखद प्रयास बताया, जबकि कई लोगों ने इसे भावनात्मक शोषण करार दिया।

एक यूजर ने टिप्पणी की कि प्रॉपर्टी मार्केट में गिरावट के बावजूद भी, इतने कम पैसों में दो लोगों (मा और उनकी बीमार बेटी) की सेवा करने के लिए नेनी भी नहीं मिल सकती।

इस बीच, एक वकील ने ध्यान दिलाया कि चीन के कानून के अनुसार, वृद्ध माता-पिता की देखभाल करना बड़ी बेटी की जिम्मेदारी है और मा इस जिम्मेदारी से कानूनी प्रक्रिया के जरिए अलग नहीं हो सकतीं। यह मामला चीन में लगातार बढ़ रही बुजुर्गों के अकेलेपन की गंभीर समस्या को उजागर करता है। 2021 के सर्वे के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 60 प्रतिशत बुजुर्ग अकेले रहते हैं।

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