Beijing, China: मेडिकल साइंस की दुनिया में एक क्रांतिकारी सफलता सामने आई है। चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा लाइफलाइक हाइड्रोजेल (Lifelike Hydrogel) तैयार किया है, जो जीवित इंसानी कोशिकाओं और टिश्यूज की तरह ही अपनी बनावट और आकार बदल सकता है। चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह अनूठा जेल शरीर के किसी भी टूटे या क्षतिग्रस्त हिस्से में डाले जाने पर धीरे-धीरे खुद-ब-खुद इंसानी हड्डी, नसें या मांसपेशियां उगाने की क्षमता रखता है। यह तकनीक भविष्य में पक्षाघात यानी लकवा (Paralysis) से पीड़ित मरीजों के इलाज में गेम-चेंजर साबित हो सकती है, क्योंकि इसकी मदद से मरीज बिना किसी सख्त या कड़े चिप को दिमाग में लगवाए फिर से चलने-फिरने में सक्षम हो सकेंगे।
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कैसे काम करता है यह वैज्ञानिक चमत्कार?
इस अभूतपूर्व रिसर्च के पीछे की मुख्य ताकत लिक्विड मेटल यानी तरल धातु है। चीनी शोधकर्ताओं ने ‘एसटीईआरएस’ (STERS) नामक एक नया सिस्टम विकसित किया है, जो प्राकृतिक जैविक प्रक्रियाओं की नकल करता है।
– लिक्विड मेटल का कमाल: वैज्ञानिकों ने इस हाइड्रोजेल के भीतर गैलियम धातु के बेहद सूक्ष्म तरल कण मिलाए हैं। जब इस हाइड्रोजेल पर नियर-इन्फ्रारेड लाइट डाली जाती है, तो लिक्विड मेटल के भीतर एक रासायनिक प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है।
– 28 दिनों तक खुद चलने वाला रिएक्शन: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसके लिए बार-बार लाइट डालने की आवश्यकता नहीं पड़ती। एक बार प्रकाश मिलने के बाद यह रिएक्शन अगले पूरे 28 दिनों तक अपने आप लगातार चलता रहता है।
– बनावट में बदलाव: लिक्विड मेटल की सतह ऑक्सीडाइज होती है, पुरानी परत हटती है और नया मेटल सामने आता है, जिससे यह जेल बिना किसी बाहरी मदद के लगातार अपना आकार बदलता रहता है।
स्टेम सेल्स के लिए तैयार करता है अनुकूल परिवेश
जब वैज्ञानिकों ने इस अभिनव हाइड्रोजेल पर स्टेम सेल्स (Stem Cells) को रखा, तो इसके नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे। यह जेल न केवल स्टेम सेल्स को सुरक्षा और संबल देता है, बल्कि उन्हें इंसानी हड्डियों और नर्व सेल्स (तंत्रिका कोशिकाओं) में परिवर्तित होने के लिए अनुकूल रास्ता भी दिखाता है।
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शरीर के भीतर जाते ही यह एक ऐसा प्राकृतिक परिवेश तैयार कर देता है, जहां कोशिकाएं खुद-ब-खुद नई हड्डियां और क्षतिग्रस्त नसें बनाने लगती हैं। जैसे-जैसे नई हड्डी या ऊतक (Tissue) का विकास होता है, यह जेल अपनी बनावट बदलकर पूरी तरह उसके अनुकूल ढल जाता है। बायोटेक्नोलॉजी और सर्जिकल चिकित्सा के क्षेत्र में यह खोज आने वाले समय में चिकित्सा जगत की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।





