अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
Health Desk: गर्दन और कंधों के बीच असामान्य रूप से चर्बी जमा होने से उभरी गांठ को अक्सर लोग सामान्य मोटापे का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह सिर्फ वजन बढ़ने का नतीजा नहीं है। इसे चिकित्सकीय भाषा में ‘बफैलो हंप’ या डोर्सोसर्वाइकल फैट पैड कहा जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह समस्या गंभीर हार्मोनल असंतुलन, कुछ दवाओं के लंबे समय तक सेवन या अन्य अंदरूनी बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकती है, जिसकी समय पर पहचान बेहद जरूरी है।
Read more: अधिक वजन की महिलाओं को फायब्रॉइड का खतरा, मोटापा बनाता है गर्भाशय में गांठ, जानें
क्यों होता है बफैलो हंप, क्या है इसका मुख्य कारण?
बफैलो हंप होने की सबसे प्रमुख वजह कुशिंग सिंड्रोम को माना जाता है। इस स्थिति में मानव शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर सामान्य से बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसा एड्रिनल या पिट्यूटरी ग्लैंड में ट्यूमर होने अथवा लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं के इस्तेमाल से हो सकता है, जिससे शरीर में वसा (फैट) का वितरण बिगड़ जाता है। इसके अलावा अस्थमा, गठिया, त्वचा रोग और ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज में दी जाने वाली कॉर्टिकोस्टेरॉयड दवाएं भी इसका कारण बनती हैं। डॉक्टरों की सलाह के बिना इन दवाओं को कभी भी खुद से शुरू या बंद नहीं करना चाहिए।
एचआईवी दवाएं और खराब पोस्चर भी डालते हैं असर
कुछ मामलों में, एचआईवी के इलाज में दी जाने वाली एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी भी शरीर में फैट के वितरण को बदल देती है, जिससे चेहरे और हाथ-पैरों की चर्बी कम होने लगती है और गर्दन या पेट के पास फैट जमा हो जाता है। हालांकि, शारीरिक निष्क्रियता और खराब खानपान भी इसमें भूमिका निभाते हैं, लेकिन केवल मोटापा ही इसका एकमात्र कारण नहीं है। लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल का गलत तरीके से इस्तेमाल (खराब पोस्चर) भी गर्दन की मांसपेशियों को कमजोर कर इस उभार को और ज्यादा स्पष्ट बना देता है।
कब कराएं डॉक्टर से जांच और क्या है इसका इलाज?
यदि गर्दन के पीछे लगातार चर्बी बढ़ रही हो, गांठ उभरी हुई दिखे, दर्द या जकड़न हो और साथ में चेहरे पर सूजन या हाई बीपी जैसे हार्मोनल असंतुलन के लक्षण नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसका उपचार पूरी तरह बीमारी के मूल कारण पर निर्भर करता है। कुशिंग सिंड्रोम होने पर हार्मोनल थेरेपी या सर्जरी की जाती है। यदि दवाएं कारण हैं, तो डॉक्टर की देखरेख में स्टेरॉयड की डोज धीरे-धीरे कम की जाती है। लाइफस्टाइल में सुधार के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सही पोस्चर अपनाने की सलाह दी जाती है। गंभीर मामलों में फैट हटाने के लिए लाइपोसक्शन सर्जरी का भी सहारा लिया जाता है।
Read more: डिलीवरी के बाद बढ़ गया है वजन? जीरा पानी से फैट होगा तुरंत कम!

