Patna: शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि बिहार में भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका समेत सभी क्षेत्रीय भाषाओं के लिए एक-एक केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि क्षेत्रीय भाषाओं के अध्ययन, शोध और संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। शिक्षा मंत्री मंगलवार को महेन्द्रू स्थित राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) में पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शिक्षक प्रशिक्षण को मजबूत करने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।
हार्ड वर्किंग से स्मार्ट वर्किंग की ओर बढ़ें व्याख्याता
शिक्षा मंत्री ने कहा कि व्याख्याताओं को अब हार्ड वर्किंग को छोड़कर स्मार्ट वर्किंग की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि अपने कार्यों का टारगेट प्वाइंट आज ही तय करें, तभी वास्तविक बदलाव दिखाई देगा। उन्होंने शिक्षकों के मूल्यांकन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण को प्रभावी और परिणामदायी बनाने की दिशा में लगातार काम किया जाना चाहिए। बैठक के दौरान मंत्री ने SCERT के सभी 11 विभागों के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से उनके कार्यों की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी ली।
SCERT से जल्द शुरू होगा ‘बिहार विद्यावाणी’ पॉडकास्ट
शिक्षा मंत्री ने बताया कि SCERT के स्टूडियो से जल्द ही ‘बिहार विद्यावाणी’ के नाम से पॉडकास्ट शुरू किया जाएगा। इसके माध्यम से शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों, नवाचारों और शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए उपयोगी जानकारी को व्यापक स्तर तक पहुंचाया जाएगा।
‘हमारा विद्यालय, हमारा स्वाभिमान’ पोर्टल जल्द होगा लॉन्च
मंत्री ने ‘हमारा विद्यालय, हमारा स्वाभिमान’ पोर्टल की जानकारी देते हुए कहा कि इसे लॉन्च करने की तैयारी अंतिम चरण में है। इस पोर्टल के माध्यम से लोगों से अपने उस विद्यालय को गोद लेने की अपील की जाएगी, जहां से उन्होंने शिक्षा प्राप्त की है। इससे पूर्ववर्ती छात्रों और विद्यालयों के बीच जुड़ाव मजबूत होगा और विद्यालयों के विकास में समाज की भागीदारी बढ़ेगी।
करीब छह लाख शिक्षकों की जिम्मेदारी SCERT पर
शिक्षा मंत्री ने कहा कि SCERT एक परिवार है और इस नाते सभी पर बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लेक्चरर से बड़ा लीडर कोई नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल शिक्षकों को प्रशिक्षण देना नहीं है, बल्कि शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का भी सर्वांगीण विकास करना है। मंत्री ने कहा कि राज्य के करीब छह लाख शिक्षकों की जिम्मेदारी SCERT के माध्यम से सभी पर है।
सात स्वैच्छिक संस्थाओं के साथ होगा लाइव डिस्कशन
श्री तिवारी ने SCERT की टीम की सराहना करते हुए कहा कि टीम बेहतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान मिले सुझावों में से कई को तत्काल लागू किया जाएगा। उन्होंने शिक्षा विभाग के साथ एमओयू करने वाली सात स्वैच्छिक संस्थाओं के साथ लाइव डिस्कशन आयोजित करने का भी निर्देश दिया। इसका उद्देश्य इन संस्थाओं के अनुभव और विशेषज्ञता का अधिकतम लाभ लेना है।
IIM जैसे संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए भेजे जाएंगे व्याख्याता
शिक्षा मंत्री ने कहा कि निकट भविष्य में SCERT के व्याख्याताओं की कार्यक्षमता और नेतृत्व क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। इससे व्याख्याता आधुनिक प्रबंधन, नेतृत्व और प्रशिक्षण की नई तकनीकों से परिचित हो सकेंगे।
दिसंबर में फिर होगी SCERT के कार्यों की समीक्षा
शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि तय किए गए लक्ष्यों के अनुरूप कार्यों में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि दिसंबर में फिर बैठक कर SCERT के कार्यों और उपलब्धियों का मूल्यांकन किया जाएगा। बैठक में शिक्षा विभाग के विशेष सचिव श्री धर्मेन्द्र कुमार, SCERT के निदेशक श्री यतेंद्र कुमार पाल के अलावा सभी विभागों के पदाधिकारी मौजूद रहे।




