Patna: नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और बिहार के सीमावर्ती जिलों में पिछले तीन-चार दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के चलते गंडक, कोसी और बागमती समेत तमाम प्रमुख नदियां उफान पर आ गई हैं। नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने और निचले इलाकों में पानी फैलने की वजह से सुपौल, पश्चिम चम्पारण एवं सहरसा जिलों में बाढ़ जैसे गंभीर हालात पैदा हो गए हैं। इन तीनों जिलों के 15 प्रखंडों की 38 ग्राम पंचायतों में करीब 1.15 लाख की आबादी बाढ़ के पानी से सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। स्थिति को देखते हुए राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने संवेदनशील इलाकों में युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है।
54 कम्युनिटी किचन शुरू, 200 नावों से रेस्क्यू
बाढ़ प्रभावित बस्तियों में फंसे लोगों की मदद के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने बड़े पैमाने पर राहत सामग्री का वितरण शुरू किया है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रभावित इलाकों में 6,000 पॉलीथीन शीट और 550 पैकेट सूखा राशन बांटा जा चुका है। पानी से घिरे गांवों से लोगों को सुरक्षित निकालने और आवागमन सुचारू रखने के लिए 200 सरकारी नावें चलाई जा रही हैं। इसके अलावा, बाढ़ पीड़ितों के लिए 54 कम्युनिटी किचन (सामुदायिक रसोई) संचालित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से अब तक 84,000 लोगों को सुबह और शाम का ताजा भोजन उपलब्ध कराया गया है।
बराजों पर नदियों की चाल: गंडक घटी, सोन का जलस्तर बढ़ा
विभिन्न बराजों से मिल रहे आंकड़ों के अनुसार, वाल्मीकिनगर बराज के पास गंडक नदी का जलस्राव सोमवार सुबह 10 बजे 4,49,250 क्यूसेक दर्ज किया गया, हालांकि अब इसमें धीरे-धीरे घटने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। वहीं, वीरपुर बराज के पास कोसी नदी का डिस्चार्ज 1,81,805 क्यूसेक के साथ स्थिर बना हुआ है। उधर, इंद्रपुरी बराज के पास सोन नदी का जलस्राव 1,50,256 क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया है और इसके लगातार बढ़ने के संकेत हैं, जिससे अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।
NDRF की 10 और SDRF की 27 टीमें तैनात
बाढ़ के खतरे और तटबंधों की सुरक्षा को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने संवेदनशील जिलों में जवानों की तैनाती बढ़ा दी है। राहत और बचाव अभियानों को गति देने के लिए एसडीआरएफ (SDRF) की 27 टीमें और एनडीआरएफ (NDRF) की 10 टीमें अलग-अलग संवेदनशील जिलों में मुस्तैद हैं। मोटरबोट्स के जरिए राहत दल लगातार निचले इलाकों में गश्त कर रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में फंसे ग्रामीणों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।




