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40 हजार करोड़ का चुनावी पैकेज: क्या नीतीश का ये कदम बदल देगा बिहार?

Patna News: बिहार की राजनीति इस वक्त अपने चरम पर है। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी हलचल तेज होती जा रही है। इस बार मुकाबला बहुत ही कांटे का माना जा रहा है। साल 2020 के चुनाव में एनडीए ने 243

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Patna News: बिहार की राजनीति इस वक्त अपने चरम पर है। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी हलचल तेज होती जा रही है। इस बार मुकाबला बहुत ही कांटे का माना जा रहा है। साल 2020 के चुनाव में एनडीए ने 243 सीटों में से 125 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि महागठबंधन को 110 सीटें मिली थीं। दिलचस्प बात यह है कि दोनों गठबंधनों के बीच सिर्फ 11,150 वोटों का अंतर था। यानी मुकाबला बेहद नज़दीकी रहा।

अब 2025 के चुनाव में माहौल एक बार फिर गर्म है, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग दिख रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लोकप्रियता पहले जैसी नहीं मानी जा रही, लेकिन उन्होंने चुनाव से पहले एक ऐसा कदम उठाया है जिसने सबका ध्यान खींच लिया है। सरकार ने महिलाओं, युवाओं और किसानों सहित कई समूहों को 40 हज़ार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता और अनुदान दिए हैं। यह राशि राज्य के कुल बजट का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा है।

क्या नीतीश का यह कदम गेमचेंजर साबित होगा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले इस तरह का “पैसों की बारिश” वाला कदम महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी देखा गया था। लेकिन बिहार में यह और भी बड़ा कदम माना जा रहा है क्योंकि राज्य का कोष सीमित है। नीतीश कुमार ने इस राशि को महिलाओं को स्वरोजगार, युवाओं को स्किल डेवलपमेंट और गरीब तबके को प्रत्यक्ष सहायता के रूप में बांटा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह वाकई जनता के मन को जीत पाएगा या इसे केवल “चुनावी स्टंट” माना जाएगा।

चिराग पासवान बन सकते हैं किंगमेकर

इस बार का चुनाव सिर्फ एनडीए बनाम महागठबंधन नहीं है। 2020 में चिराग पासवान की लोजपा ने एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ा था और करीब 25 लाख वोट (5.66%) हासिल किए थे। इस बार चिराग 35 सीटों पर उम्मीदवार उतारने पर अड़े हैं। भाजपा उन्हें 25 सीटें देने पर विचार कर रही है। चिराग ने हाल ही में कहा था, “मैं हर चुनाव क्षेत्र में 20 से 25 हज़ार वोट पलट सकता हूँ।” यह बयान इस बात का इशारा है कि वह इस बार मुख्यमंत्री पद की ओर देख रहे हैं।

प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी बनेगी फैक्टर?

इस बार एक और दिलचस्प मोड़ है — प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी। माना जा रहा है कि वह इस चुनाव में कई सीटों पर वोट बैंक को प्रभावित कर सकते हैं। यह कहना मुश्किल है कि वे एनडीए का नुकसान करेंगे या इंडिया गठबंधन का, लेकिन इतना तय है कि वोटों के विभाजन से सीधा असर परिणामों पर पड़ेगा।

एनडीए को झटका मुकेश सहनी से

वहीं एनडीए को इस बार मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी के अलग होने से नुकसान हो सकता है। 2020 में इस पार्टी को करीब 6.5 लाख वोट (1.52%) मिले थे। अब वीआईपी पार्टी इंडिया अलायंस में शामिल हो चुकी है, जिससे समीकरण और जटिल हो गया है।

बिहार की हॉट सीटें

इस बार जिन सीटों पर सबसे ज़्यादा मुकाबला माना जा रहा है, उनमें वाल्मिकीनगर, करगहर, बेतिया, मोतिहारी, इमामगंज, सीतामढ़ी, मधुबनी, झंझारपुर, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार प्रमुख हैं। इन इलाकों में जातीय समीकरण और स्थानीय उम्मीदवारों की पकड़ चुनावी नतीजे तय कर सकती है।

कौन बनेगा बिहार का किंगमेकर – चिराग, नीतीश या प्रशांत किशोर?

बिहार में इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है। एक तरफ नीतीश कुमार का 40 हजार करोड़ रुपये का “वित्तीय मास्टरस्ट्रोक”, दूसरी तरफ चिराग पासवान की किंगमेकर वाली रणनीति, और तीसरी ओर प्रशांत किशोर की नई पार्टी — तीनों मिलकर इस बार के चुनाव को बहुआयामी बना रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या नीतीश का यह आर्थिक दांव जनता के दिल में जगह बना पाता है, या मतदाता इस बार कोई नया रास्ता चुनते हैं।

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