सर्पदंश पर बड़ा अलर्ट, संतोष कुमार बोले- झाड़-फूंक नहीं, तुरंत अस्पताल पहुंचें

Jamshedpur News: दक्षिण पूर्व रेलवे के इलेक्ट्रिक लोको पायलट प्रशिक्षण केंद्र में शुक्रवार को रेल सिविल डिफेंस की ओर से सर्पदंश रोकथाम, प्राथमिक उपचार एवं आपदा प्रबंधन विषय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेल सिविल डिफेंस के इंस्पेक्टर

Jamshedpur News:  दक्षिण पूर्व रेलवे के इलेक्ट्रिक लोको पायलट प्रशिक्षण केंद्र में शुक्रवार को रेल सिविल डिफेंस की ओर से सर्पदंश रोकथाम, प्राथमिक उपचार एवं आपदा प्रबंधन विषय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेल सिविल डिफेंस के इंस्पेक्टर एवं राष्ट्रपति पदक से सम्मानित संतोष कुमार ने कहा कि झारखंड में करैत और रसेल वाइपर जैसे विषैले सांपों का खतरा सबसे अधिक है। इन दोनों प्रजातियों के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में सर्पदंश की घटनाएं होती हैं, लेकिन समय पर पहचान, सही प्राथमिक उपचार और तत्काल अस्पताल पहुंचाने से अधिकांश लोगों की जान बचाई जा सकती है।

उन्होंने बताया कि करैत प्रायः रात के समय सक्रिय रहता है और कई बार सो रहे व्यक्ति को काट लेता है। इसके काटने पर शुरुआती दर्द नहीं होने के कारण लोग इसे सामान्य कीड़े के काटने की घटना समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे उपचार में देरी हो जाती है। वहीं रसेल वाइपर खेतों, पत्थरों, लकड़ियों और ईंटों के ढेर जैसी जगहों पर छिपा रहता है तथा इसके काटने पर दांतों के स्पष्ट निशान दिखाई देते हैं। ऐसे मामलों में तुरंत चिकित्सा मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है।

संतोष कुमार ने कहा कि सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय मरीज का मनोबल बनाए रखना चाहिए और बिना किसी देरी के उसे नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। उन्होंने अंधविश्वास, झाड़-फूंक और ओझा-गुनी के चक्कर में समय बर्बाद नहीं करने की सलाह देते हुए कहा कि वैज्ञानिक उपचार ही सर्पदंश का प्रभावी समाधान है। उन्होंने यह भी बताया कि झारखंड सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा सर्पदंश से मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने का प्रावधान है।

प्रशिक्षण के दौरान डिजिटल प्रस्तुति, पावर प्वाइंट, टेली फिल्म और डमी सर्पों के माध्यम से विषैले एवं विषहीन सांपों की पहचान, सर्पदंश के लक्षण, प्राथमिक उपचार तथा न्यूरोटॉक्सिक, हेमोटॉक्सिक और मायोटॉक्सिक विष के शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी गई। साथ ही बताया गया कि भारत में लगभग 275 प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं, जिनमें सीमित संख्या ही विषैली होती है, इसलिए प्रत्येक सर्पदंश की घटना में घबराने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।

कार्यक्रम में रांची, आद्रा, खड़गपुर और चक्रधरपुर मंडल के वंदे भारत, मेल, एक्सप्रेस, पैसेंजर और मालगाड़ी के लगभग 140 वरिष्ठ एवं सहायक लोको पायलटों ने भाग लिया। डेमोंस्ट्रेटर शंकर कुमार प्रसाद ने सीपीआर, बैंडेज तकनीक और अग्निशमन यंत्र के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया। लोको पायलटों ने इस प्रशिक्षण को रेलकर्मियों की सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी बताया।

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