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बांग्लादेश में इस्लामिक पार्टियों का विरोध, जुलाई चार्टर लागू करने की मांग तेज

World News: बांग्लादेश में अगले साल होने वाले आम चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राजधानी ढाका में मंगलवार को सात कट्टरपंथी इस्लामिक राजनीतिक दलों ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया और “जुलाई चार्टर” को कानूनी मान्यता देने की मांग उठाई।

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World News: बांग्लादेश में अगले साल होने वाले आम चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राजधानी ढाका में मंगलवार को सात कट्टरपंथी इस्लामिक राजनीतिक दलों ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया और “जुलाई चार्टर” को कानूनी मान्यता देने की मांग उठाई।

इस प्रदर्शन का आयोजन जमात-ए-इस्लामी और इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश सहित अन्य दलों ने किया। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इन दलों ने राजधानी में जत्राबाड़ी से गबटोली तक मानव श्रृंखला बनाई और सरकार से मांग की कि फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनाव जुलाई चार्टर के कानूनी ढांचे के तहत कराए जाएं।

जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह की मांग

आयोजनों के दौरान जमात की ढाका इकाइयों ने पांच मुख्य मांगें रखीं — जिनमें नवंबर में जुलाई राष्ट्रीय चार्टर पर जनमत संग्रह और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation) लागू करने की मांग प्रमुख रही।

इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश के संयुक्त महासचिव गाजी अताउर रहमान ने कहा कि “राष्ट्रीय चुनाव की तिथि घोषित करने से पहले जुलाई चार्टर को कानूनी मान्यता दी जानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो यह चार्टर निष्प्रभावी हो जाएगा और देश में चुनाव संकट गहरा सकता है।”

राजनीतिक स्थिति और विपक्ष का रुख

बांग्लादेश के प्रमुख अखबार प्रथम आलो ने रिपोर्ट किया कि इस विषय पर इस्लामिक आंदोलन, खिलाफत मजलिस, जगपा, और नेजाम-ए-इस्लाम जैसी पार्टियों ने भी ढाका के विभिन्न इलाकों में समानांतर प्रदर्शन किए।

दूसरी ओर, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने आरोप लगाया है कि 1971 के युद्ध में पराजित समूह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं। बीएनपी का कहना है कि ये दल चुनावों को अस्थिर करने और सरकार विरोधी माहौल पैदा करने की साजिश कर रहे हैं।

बांग्लादेश अगले वर्ष होने वाले चुनावों से पहले लगातार राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि जुलाई चार्टर पर चल रहा यह विवाद देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।

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