Health Adda: खराब जीवनशैली और लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत ने आज अधिकांश लोगों को कमर दर्द का मरीज बना दिया है। सुबह सोकर उठते ही अगर पीठ में अकड़न और तनाव महसूस होता है, तो इसकी एक बड़ी वजह आपका जरूरत से ज्यादा नरम और मखमली गद्दा हो सकता है। ऐसे में राहत पाने के लिए जीवनशैली में एक छोटा लेकिन कारगर बदलाव जरूरी है—बिस्तर के बजाय जमीन पर सोना। भारतीय परंपरा और शास्त्रों में भी जमीन पर सोने के कई शारीरिक और मानसिक लाभ बताए गए हैं।
रीढ़ की हड्डी और शरीर का संरेखण रहता है दुरुस्त
जमीन पर सपाट सतह पर सोने से शरीर का पोस्चर प्राकृतिक रूप से संतुलित रहता है। जब आप सख्त सतह पर लेटते हैं, तो कंधों से लेकर शरीर का निचला हिस्सा एक सीध में बना रहता है। अत्यधिक मुलायम गद्दों में शरीर का बीच का हिस्सा धंस जाता है, जिससे रीढ़ की हड्डी का प्राकृतिक कर्व बिगड़ता है। जमीन पर सोने से स्पाइन को सीधा सहारा मिलता है, जिससे नसों पर दबाव नहीं पड़ता और पूरे शरीर में खून का बहाव सुचारू रूप से चलता है। इसी कारण अगले दिन सुबह उठने पर शरीर हल्का और फ्रेश महसूस होता है।
नसों का खिंचाव और कूल्हों के दर्द से राहत
डेस्क जॉब करने वालों में कुल्हों और पीठ के निचले हिस्से का दर्द आम बात है। ऑफिस की कुर्सी पर घंटों एक ही स्थिति में बैठे रहने से हिप्स और लोअर बैक की मांसपेशियां जकड़ जाती हैं। जमीन पर सोने से इन मांसपेशियों को पूरा खिंचाव और आराम मिलता है। इससे कंधों की अकड़न, नसों में खिंचाव और मांसपेशियों का दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है। नियमित रूप से यह आदत अपनाने पर कूल्हों और हिप्स में होने वाली टीस से भी राहत मिलती है।
जमीन पर सोते समय इन बातों का रखें ध्यान
जमीन पर सोने का मतलब सीधे ठंडे फर्श या टाइल्स पर सोना नहीं है। फर्श पर हमेशा एक पतली सूती दरी, योगा मैट या पतली चादर बिछाकर ही सोएं। इसके अलावा, बहुत ऊंचे तकिए का इस्तेमाल करने से बचें ताकि गर्दन और रीढ़ का तालमेल न बिगड़े। अगर किसी को स्लिप डिस्क या गंभीर आर्थराइटिस की पुरानी समस्या है, तो उन्हें किसी भी बड़े बदलाव से पहले अपने फिजियोथेरेपिस्ट या ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।




