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भुना चना बना ज़हर! कैंसरकारी ‘औरामाइन’ पर प्रियंका चतुर्वेदी का सवाल

India News: दिल्ली में एक नई मिलावटखोरी का मामला सामने आया है, जिसने लोगों की रोज़मर्रा की सेहत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाजार में बिकने वाले चमकीले पीले-भुने चनों में घातक इंडस्ट्रियल केमिकल ‘औरामाइन’ मिलने की आशंका ने हलचल मचा दी है। यह

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India News: दिल्ली में एक नई मिलावटखोरी का मामला सामने आया है, जिसने लोगों की रोज़मर्रा की सेहत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाजार में बिकने वाले चमकीले पीले-भुने चनों में घातक इंडस्ट्रियल केमिकल ‘औरामाइन’ मिलने की आशंका ने हलचल मचा दी है। यह वही सिंथेटिक डाई है जिसका इस्तेमाल कपड़ा, चमड़ा और कागज़ उद्योग में होता है—लेकिन खाद्य पदार्थों में इसका उपयोग कानूनन पूरी तरह प्रतिबंधित है।

प्रियंका चतुर्वेदी का केंद्र को कड़ा पत्र

राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताते हुए स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि देशभर में तुरंत हेल्थ अलर्ट जारी किया जाए और ऐसे चनों की सख्त जांच हो। उनका कहना है कि यह सिर्फ फूड सेफ्टी एक्ट का उल्लंघन नहीं, बल्कि लाखों भारतीयों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है।

कैंसर का खतरा—WHO भी चेतावनी दे चुका

औरामाइन एक तेज पीला रंग है जो पानी में आसानी से घुल जाता है। WHO की कैंसर रिसर्च एजेंसी IARC ने इसे संभावित कार्सिनोजन (ग्रुप 2B) वर्ग में रखा है। लगातार सेवन से लिवर, किडनी और ब्लैडर कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ता है। साथ ही नर्वस सिस्टम को नुकसान, अंग फेल होने और शरीर में ज़हरीली ब्लॉकेज जैसी गंभीर समस्याएँ भी हो सकती हैं।

लालच में मिलावट—औरामाइन से चना दिखता है ‘अट्रैक्टिव’

मिलावटखोर चनों को ज्यादा चमकदार और बेचने लायक दिखाने के लिए इस घोल का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे चने असामान्य रूप से पीले, ज़्यादा कुरकुरे और दिखाई देने में साफ-सुथरे लगते हैं। सोशल मीडिया पर कई लोग वीडियो डालकर दिखा रहे हैं कि गर्म पानी में ऐसे चने डालते ही पानी तुरंत पीला हो जाता है—यही औरामाइन की पहचान है।

लोग क्या करें? विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि भुना चना सिर्फ पैकेटबंद और भरोसेमंद ब्रांड का ही खरीदें। खुले चने अगर ज़रूरत से ज्यादा चमकदार लग रहे हों या उनमें केमिकल की तेज गंध हो, तो उन्हें तुरंत फेंक दें। सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन एफएसएसएआई और स्वास्थ्य मंत्रालय पर कार्रवाई का दबाव बढ़ चुका है।

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