Travel News in India: क्या आपने कभी ऐसी जगह की कल्पना की है, जहां सुबह तो होती है लेकिन सूरज दिखाई नहीं देता? जहां पहाड़ सामने होते हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी सिर्फ ठंडी हवा और गहरी खामोशी से महसूस होती है। अनिनी वैली ऐसी ही एक जगह है, जो बादलों के ऊपर बसी हुई लगती है और जहां की धुंध भरी सड़कें किसी सपने की तरह आगे बढ़ती चली जाती हैं।
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पूर्वोत्तर भारत को यूं ही देश का सबसे खूबसूरत इलाका नहीं कहा जाता। जब अरुणाचल प्रदेश का नाम आता है, तो अक्सर तवांग या जीरो वैली याद की जाती है। लेकिन इन मशहूर जगहों से काफी दूर, दिबांग घाटी में स्थित अनिनी वैली आज भी भीड़-भाड़ से दूर अपनी प्राकृतिक शांति को संजोए हुए है। यह न सिर्फ एक पर्यटन स्थल है, बल्कि दिबांग जिले का मुख्य केंद्र भी माना जाता है।
अनिनी तक पहुंचने का सफर थोड़ा लंबा जरूर है, लेकिन उतना ही खूबसूरत भी। ईटानगर से यहां की दूरी करीब 570 किलोमीटर है, जबकि असम के डिब्रूगढ़ से लगभग 381 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। घुमावदार पहाड़ी सड़कें, हर मोड़ पर बदलते नज़ारे और खिड़की से आती ठंडी हवा सफर को यादगार बना देती है।
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अनिनी वैली की सबसे बड़ी खासियत इसकी कुदरती बनावट है। चारों ओर हिमालय की ऊंची चोटियां, हरे-भरे मैदान और पहाड़ों से गिरते झरने इसे किसी पेंटिंग जैसा रूप देते हैं। यहां की धुंध कभी पूरी घाटी को सफेद चादर में ढक लेती है, तो कभी अचानक हटकर पहाड़ों का शानदार नज़ारा दिखा देती है।
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मिश्मी हिल्स, ड्री और मथुन नदियों की कलकल आवाज और अनिनी व्यू पॉइंट इस जगह को और खास बना देते हैं। गर्मियों में जब मैदानी इलाके तप रहे होते हैं, तब यहां की हवा सुकून देती है। सर्दियों में बर्फबारी के बाद अनिनी किसी परीकथा की दुनिया जैसी लगने लगती है।
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अनिनी वैली उन लोगों के लिए है, जो शोर से दूर जाकर प्रकृति की खामोशी में खुद को ढूंढना चाहते हैं। अगर नॉर्थ-ईस्ट की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इस बादलों के ऊपर बसी घाटी को अपनी सूची में जरूर रखें।




