Patna / Banka: बिहार सरकार द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना’ ग्रामीण इलाकों में बदलाव की नई इबारत लिख रही है। कभी रोजगार की तलाश में परिवार सहित परदेस जाकर मजदूरी करने को मजबूर होने वाली महिलाएं आज न केवल अपने गांव में सफल उद्योग चला रही हैं, बल्कि दर्जनों अन्य महिलाओं को आजीविका भी मुहैया करा रही हैं। बांका जिले के बाराहाट प्रखंड स्थित नया नगरी गांव की रहने वाली बबीता कुमारी और भीतिया गांव की ममता कुमारी की सफलता इस बदलाव का सबसे जीवंत उदाहरण बनकर उभरी है।
जालंधर में मजदूरी से ₹40 लाख के टर्नओवर तक
बबीता कुमारी बताती हैं कि इस योजना का लाभ मिलने से पहले वे और उनके पति पंजाब के जालंधर स्थित एक फुटबॉल निर्माण कारखाने में मजदूरी करते थे। वहां दिन-रात पसीना बहाने के बाद दोनों को महज 10 से 15 हजार रुपये की मामूली पगार मिलती थी। आर्थिक तंगी के कारण वे गांव लौटकर खुद का व्यवसाय शुरू करने की सोच भी नहीं सकती थीं। इसी बीच समाचार पत्र के माध्यम से उन्हें मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना की जानकारी मिली। ऑनलाइन आवेदन के जरिए ऋण स्वीकृत होते ही उन्होंने अपने गांव लौटकर घर में ही फुटबॉल निर्माण की आधुनिक इकाई स्थापित की। आज उनके इस उद्यम का सालाना टर्नओवर ₹40 लाख के पार पहुंच चुका है।
50 महिलाओं को दिया रोजगार, 4 राज्यों में जा रहे उत्पाद
बबीता की इस निर्माण इकाई में वर्तमान में 50 से अधिक स्थानीय महिलाएं काम कर रही हैं। उनके कारखाने में बने गुणवत्तापूर्ण फुटबॉल की मांग केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम के बाजारों में भी इनके उत्पादों की भारी आपूर्ति की जा रही है।

इसी तरह बांका के भीतिया गांव की ममता कुमारी ने 2024 में योजना के तहत 7 लाख रुपये का ऋण हासिल कर आटा और बेसन उत्पादन के लिए फ्लोर मिल की स्थापना की। आज ममता हर महीने 50 हजार रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं और अपने साथ गांव के 5 अन्य लोगों को नियमित रोजगार भी दे रही हैं।
9 हजार से अधिक महिलाओं को मिला संबल
उल्लेखनीय है कि बिहार सरकार द्वारा वर्ष 2021 में ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना’ की शुरुआत की गई थी। इस योजना के अंतर्गत महिलाओं को सूक्ष्म एवं लघु उद्योग स्थापित करने के लिए ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता (जिसमें 50 प्रतिशत अनुदान और शेष ब्याजमुक्त ऋण) दी जाती है। अब तक राज्य की 9 हजार से अधिक महिलाएं इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उठाकर अपने सपनों के व्यवसाय को धरातल पर उतार चुकी हैं।



