Lifestyle Adda: अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे अनुशासन में रहें और उनका व्यवहार बेहतर हो, तो सबसे पहले आपको खुद को बदलना होगा। बच्चों के लिए उनके माता-पिता ही सबसे पहले और सबसे बड़े रोल मॉडल होते हैं। इसलिए, जो बुरी आदतें आप अपने बच्चों में नहीं देखना चाहते, उन्हें सबसे पहले अपने जीवन से दूर रखना होगा।
कई बार लोग बात-बात पर गुस्सा करते हैं और बच्चों पर चिल्लाते हैं, जिसका बच्चों के कोमल मन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। आपको अपनी इस आदत को बदलने की सख्त जरूरत है। बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार न केवल आपके और उनके रिश्तों को मजबूत बनाता है, बल्कि उनके मानसिक विकास में भी सहायक होता है। आप जैसा व्यवहार बच्चों से देखना चाहते हैं, वैसा ही व्यवहार आपको उनके साथ करना होगा।
गुस्से की असल वजह और बच्चों पर इसका असर
बच्चों की शरारत, जिद, बात न मानना या कोई गलती करना अक्सर माता-पिता को गुस्सा करने का मौका दे देता है, लेकिन इस व्यवहार का कारण हमेशा बच्चे ही हों, यह जरूरी नहीं है। कई बार दफ्तर का तनाव, आपसी रिश्तों में खटास, थकान से पैदा हुआ चिड़चिड़ापन या खराब स्वास्थ्य ऐसे कारण होते हैं, जिनका गुस्सा हम अनजाने में बच्चों पर उतार देते हैं। बच्चों पर चिल्लाने से आपके आपसी संबंध तो खराब होते ही हैं, साथ ही बच्चे भी यही गलत आदतें आपसे सीखते हैं। यदि वे आपको बात-बात पर गुस्सा करते देखेंगे, तो वे भी अपने से छोटे भाई-बहनों या दोस्तों पर चिल्लाना शुरू कर देंगे।
वर्किंग पेरेंट्स के लिए सुबह की भागदौड़ संभालने के उपाय
यदि आप कामकाजी हैं, तो रोजाना सुबह ऑफिस जाने की तैयारी और बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना एक बहुत बड़ा टास्क बन जाता है। खासकर छोटे बच्चों के मामले में देरी होने पर अक्सर माता-पिता का गुस्सा बच्चों पर निकल जाता है। इस स्थिति से बचने के कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं:
– थोड़ा पहले उठें: बच्चों के जागने से कुछ समय पहले उठकर अपनी तैयारी पूरी कर लें, ताकि बाद में बच्चों को शांति से तैयार कर सकें।
– सही टाइम-मैनेजमेंट: पहले बच्चों को नहलाकर उनके कपड़े पहना दें और उन्हें नाश्ता करने दें, और उस दौरान आप अपनी तैयारी पूरी कर लें। इससे सुबह की हड़बड़ाहट और तनाव कम होगा।
संक्षेप में कहें तो, बच्चे उपदेशों से ज्यादा माता-पिता के आचरण से सीखते हैं। इसलिए बच्चों को सुधारने से पहले खुद को एक बेहतर रोल मॉडल के रूप में ढालें।







