रांची: आगामी दीपावली, काली पूजा और लोक आस्था के महापर्व छठ को शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराने के साथ-साथ जिले में चल रही विकास योजनाओं की रफ्तार बढ़ाने के लिए रांची जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है। समाहरणालय सभागार में उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में दो अहम उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की गईं। बैठकों में जहां एक ओर छठ घाटों की सुरक्षा और त्योहारों की विधि-व्यवस्था को लेकर कड़े दिशा-निर्देश तय किए गए, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार और सरकारी योजनाओं को धरातल पर समयबद्ध ढंग से उतारने के लिए अफसरों को सख्त हिदायत दी गई।
छठ घाटों पर पुख्ता सुरक्षा, स्विमिंग पर रहेगा पूर्ण प्रतिबंध
छठ महापर्व की संवेदनशीलता और जन-आस्था को रेखांकित करते हुए उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि व्रतियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने नगर निगम और संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि छठ से पूर्व सभी घाटों, तालाबों और पहुंच मार्गों की मरम्मत और युद्धस्तर पर सफाई सुनिश्चित की जाए। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए गहरे पानी वाले स्थानों पर मजबूत बांस की बैरिकेडिंग अनिवार्य की गई है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित सीमा में रहकर ही अर्घ्य दे सकें। इसके अतिरिक्त, संवेदनशील घाटों पर एनडीआरएफ की टीमें और स्थानीय गोताखोर तैनात रहेंगे। छठ के दौरान घाटों पर तैराकी (स्विमिंग) को पूरी तरह प्रतिबंधित रखने का फैसला लिया गया है।
पटाखों और ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती, युवाओं का बनेगा नेटवर्क
दीपावली और काली पूजा के दौरान पर्यावरण और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने स्पष्ट रूपरेखा तैयार की है। बैठक में अवैध और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों की बिक्री व उपयोग पर कड़ी निगरानी रखने तथा खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी की जांच के आदेश दिए गए। रात्रि 10 बजे के बाद ध्वनि प्रदूषण पर पूर्ण रोक रहेगी। इसके अलावा पूजा समितियों को अपने साथ अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने और आपातकालीन सूचनाओं के तुरंत आदान-प्रदान के लिए विशेष व्हाट्सएप ग्रुप तैयार करने को कहा गया है। विद्युत सुरक्षा, पंडालों के सुरक्षा मानकों या मूर्ति विसर्जन के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
विकास योजनाओं में लेटलतीफी नामंजूर, समय पर दफ्तर आएं कर्मी
वरिष्ठ अधिकारियों की समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कोई भी सरकारी फाइल या जनहित से जुड़ा कार्य बेवजह लंबे समय तक लंबित नहीं रहना चाहिए। योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ वास्तविक और जरूरतमंद लाभुकों तक पारदर्शिता के साथ पहुंचना चाहिए।
प्रशासनिक अनुशासन पर जोर देते हुए डीसी ने समाहरणालय और अन्य कार्यालयों में पदस्थापित सभी पदाधिकारियों व कर्मचारियों को समय पर दफ्तर पहुंचने और जनता के साथ संवेदनशीलता व शालीनता से पेश आने के कड़े निर्देश दिए। अधिकारियों को नियमित रूप से अपने अधीनस्थ कर्मियों के कामकाज की समीक्षा करने का दायित्व सौंपा गया ताकि प्रशासनिक कार्यकुशलता में सुधार हो सके।

पटाखों और ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती, युवाओं का बनेगा नेटवर्क



