Itanagar: देश के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में रविवार सुबह भूकंप के झटकों से धरती कांप उठी। राज्य के शि योमी जिले में सुबह-सुबह आए इन झटकों के कारण लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 3.4 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से मात्र 5 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। गनीमत रही कि इस घटना में किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान या किसी व्यक्ति के हताहत होने की खबर नहीं है, हालांकि बार-बार आ रही भूगर्भीय हलचलों ने स्थानीय लोगों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
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जमीन से महज 5 किमी नीचे था केंद्र, उथले भूकंप से बढ़ा कंपन
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, यह भूकंप रविवार सुबह 6 बजकर 59 मिनट और 25 सेकंड पर दर्ज किया गया। इसका केंद्र 28.503 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 94.419 डिग्री पूर्वी देशांतर पर केंद्रित था। भूविज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार, जब भूकंप का केंद्र जमीन की सतह के इतने करीब (उथला) होता है, तो सतह पर कंपन अपेक्षाकृत अधिक महसूस होता है। हालांकि, तीव्रता कम होने के कारण कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। उल्लेखनीय है कि पूर्वोत्तर के अलावा हाल के दिनों में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और दिल्ली-एनसीआर में भी बार-बार धरती डोलने की घटनाएं सामने आई हैं।
हिमालयी क्षेत्र को ‘जोन-VI’ में शामिल करने का प्रस्ताव
देशभर में लगातार बढ़ रही भूकंपीय गतिविधियों को देखते हुए भारत के भूकंप जोखिम मानचित्र (अर्थक्वेक रिस्क मैप) में बड़े संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। नई वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित इस प्रस्ताव के तहत पूरे हिमालयी क्षेत्र को भूकंपीय जोखिम की सबसे खतरनाक और नई श्रेणी ‘जोन-VI’ में शामिल किए जाने की योजना है। टेक्टोनिक प्लेटों के घर्षण और सक्रियता के कारण हिमालयी पट्टी को दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में गिना जाता है।
देश का 61 प्रतिशत भूभाग अब भूकंप के उच्च जोखिम में
प्रस्तावित नए मानचित्र के अनुसार, देश का लगभग 61 प्रतिशत भूभाग मध्यम से लेकर अत्यधिक उच्च भूकंपीय जोखिम की श्रेणी में आ जाएगा, जो कि पुराने वर्गीकरण के 59 प्रतिशत से अधिक है। अब तक देश को कुल चार सक्रिय जोनों (जोन-II से जोन-V) में बांटा गया था, जिसमें जोन-V सबसे खतरनाक माना जाता था और इसके अंतर्गत देश का 11 प्रतिशत हिस्सा आता था। विशेषज्ञों का मानना है कि नए वैज्ञानिक आकलन और जोन-VI के गठन से निर्माण मानकों और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और अधिक कड़ा करने में मदद मिलेगी।





