Lifestyle Add: आज के समय में स्कूलों में बच्चों के साथ होने वाली विभिन्न घटनाएं और हादसे माता-पिता के मन में गहरी चिंता पैदा कर देते हैं। बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जितनी स्कूल प्रशासन की होती है, उतनी ही सतर्कता अभिभावकों को भी बरतनी पड़ती है। घर से स्कूल बस में बैठने से लेकर स्कूल पहुंचने तक और छुट्टी के बाद घर लौटने तक बच्चों की सुरक्षा पर पैनी नजर रखना बेहद आवश्यक है।
अभिभावकों को अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
1. परिवहन और यात्रा के दौरान सुरक्षा
– ड्राइवर और कंडक्टर का संपर्क: स्कूल बस के ड्राइवर और कंडक्टर का मोबाइल नंबर हमेशा अपने पास रखें। स्कूल पहुंचने के समय तक उनसे संपर्क में रहें।
– वीडियो कॉल का उपयोग: यदि ड्राइवर या कंडक्टर के पास स्मार्टफोन है, तो आप वीडियो कॉल के जरिए भी बच्चे से बात कर सकते हैं, जिससे आपको उसकी लाइव स्थिति का पता चलता रहे।
– ट्रैकिंग ऐप्स: आजकल कई ऐसे आधुनिक ऐप्स और GPS ट्रैकिंग सिस्टम आ गए हैं, जिनकी मदद से आप स्कूल बस और अपने बच्चे की लाइव लोकेशन को आसानी से ट्रैक कर सकते हैं।
– स्कूल पहुंचते ही पुष्टि: बच्चा स्कूल सुरक्षित पहुंच गया है, इसकी पुष्टि के लिए स्कूल के अटेंडेंट या क्लास टीचर से संपर्क बनाए रखें।
2. स्कूल परिसर में सतर्कता और बच्चों को सीख
– घर के पास का स्कूल चुनें: संभव हो तो ऐसा स्कूल चुनें जो घर से केवल 20 से 25 मिनट की दूरी पर हो, ताकि आपात स्थिति में तुरंत पहुंचा जा सके।
– कैमरे और निगरानी: एडमिशन के समय ही यह सुनिश्चित कर लें कि स्कूल के सभी क्लासरूम, हॉल, लॉबी और यहां तक कि गार्डन एरिया में भी सीसीटीवी कैमरे लगे हों और वे पूरी तरह चालू अवस्था में हों।
– अकेले न रहने की सीख: बच्चों को यह जरूर सिखाएं कि वे स्कूल में कहीं भी अकेले न जाएं। हमेशा अपने दोस्तों या ग्रुप के साथ रहें और कहीं भी जाने से पहले अपनी क्लास टीचर को जरूर बताएं।
– बाथरूम और टॉयलेट की सुरक्षा: स्कूल के टॉयलेट कितने सुरक्षित हैं और वहां नियमित रूप से कोई अटेंडेंट बैठता है या नहीं, इस बात की पूरी जानकारी रखें। अपने बच्चे से भी समय-समय पर इस बारे में पूछते रहें।
3. स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन
– सुरक्षाकर्मी और कर्मचारी: स्कूल में तैनात सभी गार्ड्स का पुलिस वेरिफिकेशन हुआ है या नहीं, इसकी जानकारी स्कूल प्रबंधन से लें।
– टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ: स्कूल के सभी शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों (सफाई कर्मी, चपरासी आदि) का भी पुलिस वेरिफिकेशन और उनकी मानसिक स्थिति की जांच का रिकॉर्ड स्कूल के पास होना चाहिए।
4. बच्चे की बात को कभी नजरअंदाज न करें
यदि आपका बच्चा स्कूल के बारे में कोई बात बताता है, चाहे वह छोटी हो या बड़ी, तो उसे कभी भी नजरअंदाज न करें। बच्चे की किसी भी शिकायत या संकोच को गंभीरता से लें और तसल्ली के लिए तुरंत संबंधित शिक्षक या स्कूल प्रशासन से बात करें। बच्चों को यह विश्वास दिलाएं कि वे किसी भी बात को लेकर आपसे खुलकर बात कर सकते हैं।





