Patna: बिहार में प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षाओं के आयोजन को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के 29 जिलों में 29 बहुउद्देशीय हाईटेक परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह का निर्माण कराया जाएगा। इस पूरी परियोजना पर 330 करोड़ 7 लाख 13 हजार 343 रुपये (₹330.07 करोड़) की लागत आएगी। तकनीकी मंजूरी मिलने के बाद योजना को प्रशासनिक स्वीकृति भी दे दी गई है, जिससे निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह के अनुसार, प्रत्येक चार मंजिला (G+3) भवन के लिए 1 से 1.5 एकड़ जमीन चिह्नित की जा चुकी है।
एक साथ 4,000 छात्र दे सकेंगे परीक्षा, हाईटेक निगरानी
प्रस्तावित परीक्षा भवनों की रूपरेखा बड़े स्तर पर परीक्षा संचालन के लिए तैयार की गई है। एक भवन में लगभग 4,000 परीक्षार्थी एक साथ बैठकर परीक्षा दे सकेंगे। पूरा परिसर 24×7 CCTV कैमरों, आधुनिक फायर अलार्म और अग्निशमन उपकरणों से लैस रहेगा। परीक्षा संपन्न होने के बाद इन्हीं भवनों में उत्तरपुस्तिकाओं के सुरक्षित भंडारण (वज्रगृह), बारकोडिंग, डिजिटल स्कैनिंग और मूल्यांकन की भी इन-हाउस व्यवस्था होगी। इससे BPSC, BSSC, तकनीकी सेवा आयोग और पुलिस भर्ती जैसी परीक्षाओं के लिए अब जिला स्तर पर सामान्य स्कूलों और कॉलेजों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
बापू परीक्षा परिसर की तर्ज पर जिलों में विस्तार
यह ढांचागत विकास पटना के कुम्हरार स्थित बापू परीक्षा परिसर की सफलता के आधार पर किया जा रहा है। 2023 में शुरू हुए बापू परिसर में एक साथ 16,600 से अधिक ऑफलाइन और 3,500 ऑनलाइन परीक्षार्थियों के बैठने की व्यवस्था है। इसी मॉडल को अब जिलों में लागू किया जा रहा है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा पहले ही 9 प्रमंडलीय मुख्यालयों में ऐसे परीक्षा भवन और क्षेत्रीय कार्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जहां मुफ्त कोचिंग और ऑनलाइन परीक्षाओं का आयोजन होता है। अब शेष 29 जिलों में इन भवनों के बनने से पूरे राज्य में एक समर्पित नेटवर्क तैयार हो जाएगा।
स्कूलों में पठन-पाठन नहीं होगा प्रभावित
इस परियोजना का सीधा फायदा सामान्य स्कूली छात्रों को मिलेगा। अब तक परीक्षाओं और निर्वाचन (चुनाव) कार्यों के दौरान स्कूलों का अधिग्रहण कर लिया जाता था, जिससे हफ्तों तक कक्षाएं बाधित रहती थीं। नए भवनों में संवेदनशील प्रशासनिक व चुनावी सामग्री के भंडारण की भी सुविधा होगी। साथ ही, जिन शिक्षण संस्थानों के परिसर में ये G+3 भवन बनेंगे, उनके गैर-परीक्षा दिनों में संचालन का जिम्मा उन्हीं संस्थानों के पास रहेगा, ताकि वे अपनी आंतरिक शैक्षणिक गतिविधियां और परीक्षाएं बिना किसी बाधा के आयोजित कर सकें।




