Kolkata: पश्चिम बंगाल में होने जा रहे विधानसभा उपचुनाव से पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी खेमे) को लगातार दूसरे दिन अप्रत्याशित और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। नंदीग्राम विधानसभा सीट से उम्मीदवारी वापस लिए जाने के ठीक 24 घंटे बाद, अब मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर सीट से भी पार्टी प्रत्याशी रबीउल आलम चौधरी ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। शनिवार को नामांकन वापसी की अंतिम समयसीमा के दौरान चौधरी ने आधिकारिक तौर पर चुनावी मैदान से हटने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही दोनों अहम सीटों पर ममता बनर्जी खेमे के प्रत्याशी औपचारिक रूप से मुकाबले से बाहर हो चुके हैं।
‘नए चुनाव चिह्न और कार्यकर्ताओं की बेरुखी से लिया फैसला’
शनिवार सुबह पत्रकारों से बातचीत करते हुए रबीउल आलम चौधरी ने कहा कि उन्होंने अपने इस कड़े फैसले से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा दिया है। उन्होंने मैदान छोड़ने के पीछे दो प्रमुख वजहें गिनाईं। पहली यह कि निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में आवंटित नए चुनाव चिह्न (‘फुटबॉल खिलाड़ी’) को इतने कम समय में मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बनाना बेहद मुश्किल था। दूसरा यह कि स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रूप से प्रचार में नहीं उतारा जा रहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और समर्थकों से गहन विचार-विमर्श के बाद ही उन्होंने नाम वापस लेने का निर्णय लिया है।
48 घंटे में नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों से बाहर
गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी खेमे की प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने भी नाटकीय घटनाक्रम के तहत अपना पर्चा वापस ले लिया था। संचिता प्रधान ने नामांकन वापस लेने से ऐन पहले नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी, जिससे सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलें शुरू हो गई थीं।
नंदीग्राम में संचिता के हटने के बाद ममता बनर्जी ने वहां कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को खुला समर्थन देने का ऐलान किया था। हालांकि, समर्थन की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर मिलन प्रधान को पुलिस ने साल 2007 के एक पुराने आपराधिक मामले में गिरफ्तार कर लिया। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है।
अब रेजीनगर में भी उम्मीदवार के पीछे हटने के बाद आगामी 6 अक्टूबर को होने वाले मतदान से पहले पश्चिम बंगाल का सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है और दोनों सीटों पर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।



