Health Adda: अक्सर माता-पिता बच्चों के संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य, खान-पान और वजन पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन दांतों की स्वच्छता और देखभाल को नजरअंदाज कर देते हैं। कई लोग यह मानकर लापरवाही बरतते हैं कि ‘दूध के दांत तो टूट ही जाने हैं’। दंत चिकित्सकों के अनुसार, बच्चों के दांतों की अनदेखी सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है। ओरल हेल्थ में आई खराबी का असर केवल मुंह और मसूड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह बच्चे के संपूर्ण शारीरिक विकास, बोलने के ढंग और पोषण स्तर को भी सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
कैसे शुरू होती है दांतों में कैविटी?
बच्चों के दांतों में सड़न की शुरुआत बेहद धीमी गति से होती है। शुरुआती दौर में दांतों की ऊपरी सतह पर सफेद या हल्के भूरे रंग के छोटे धब्बे उभरते हैं। मुंह में मौजूद बैक्टीरिया जब अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों, चॉकलेट या चिपचिपे जंक फूड के संपर्क में आते हैं, तो वे एसिड बनाते हैं। यह एसिड दांतों की सुरक्षात्मक ऊपरी परत (एनामेल) को धीरे-धीरे गलाने लगता है। यदि समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यही धब्बे गहरे होकर गड्ढे यानी कैविटी का रूप ले लेते हैं।
शारीरिक विकास और बोलने की क्षमता पर प्रभाव
दांतों की बीमारी केवल दर्द या सूजन तक सीमित नहीं रहती। गंभीर सड़न के कारण बच्चों को खाना चबाने में तेज दर्द होता है, जिसके चलते वे ठोस और पौष्टिक आहार खाने से कतराने लगते हैं। नतीजतन, बच्चों में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जो उनके वजन और कद के सामान्य विकास को रोक देती है। इसके अतिरिक्त, आगे के दांतों में समय से पहले होने वाली सड़न या नुकसान से बच्चों के शब्दों का उच्चारण और बोलने की क्षमता (स्पीच डेवलपमेंट) भी बाधित होती है।
रूट कैनाल और दांत निकालने की नौबत
जब कैविटी का इलाज शुरुआती चरण में नहीं कराया जाता, तो संक्रमण गहराते हुए दांत के भीतर मौजूद जीवित नसों और रक्त वाहिकाओं (पल्प) तक पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में दर्द असहनीय हो जाता है और दंत चिकित्सक के पास केवल दो ही रास्ते बचते हैं—पहला, रूट कैनाल ट्रीटमेंट (RCT), जिसके जरिए संक्रमित नस को निकालकर दांत को बचाया जाता है; और दूसरा, टूथ एक्सट्रैक्शन यानी दांत को उखाड़ना, जब संक्रमण मसूड़ों और जबड़े की हड्डी तक फैलने का खतरा हो। हालांकि, यदि शुरुआती चरण में ही डेंटिस्ट को दिखा लिया जाए, तो साधारण फिलिंग से ही दांत सुरक्षित रह सकता है।
बचाव के आसान और जरूरी उपाय
दिन में दो बार ब्रशिंग: बच्चों को सुबह और रात को सोने से पहले फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से कम से कम 2 मिनट तक ब्रश करने की आदत डालें।
दूध के बाद कुल्ला: रात में दूध पीने या फीडिंग के तुरंत बाद बच्चे का मुंह साफ पानी से जरूर साफ करवाएं ताकि दूध की परत दांतों पर न जमे।
मीठे और चिपचिपे भोजन पर नियंत्रण: पैकेज्ड जूस, चॉकलेट, टॉफी और जंक फूड का सेवन सीमित करें।
नियमित डेंटल चेकअप: हर छह महीने में बच्चे को किसी बाल दंत रोग विशेषज्ञ (पेडियाट्रिक डेंटिस्ट) को जरूर दिखाएं ताकि किसी भी समस्या को शुरुआत में ही पकड़ा जा सके।




