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स्विमिंग पूल का पानी कर सकता है बच्चों की आंखें खराब, ऐसे रखें सुरक्षित

स्विमिंग पूल में मौजूद क्लोरीन और हानिकारक बैक्टीरिया बच्चों की नाजुक आंखों में 'पिंक आई' यानी कंजंक्टिवाइटिस का कारण बन सकते हैं, जिससे बचाव के लिए गॉगल्स और स्वच्छता बेहद जरूरी

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Health Adda: गर्मियों के मौसम में स्विमिंग पूल बच्चों के लिए मौज-मस्ती और शारीरिक व्यायाम का सबसे पसंदीदा जरिया बन जाता है। पानी में छलांग लगाना, दोस्तों के साथ तैरना और खेलना बच्चों को ताजगी से भर देता है। हालांकि, इस मस्ती के बीच एक अनदेखा स्वास्थ्य जोखिम भी छिपा होता है, जो सीधे बच्चों की नाजुक आंखों को प्रभावित करता है। स्विमिंग पूल के पानी में मौजूद रोगाणु और रासायनिक तत्व बच्चों में आंखों के संक्रमण का कारण बन सकते हैं, जिसे चिकित्सकीय भाषा में कंजंक्टिवाइटिस या ‘पिंक आई’ (Pink Eye) कहा जाता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आंखों की रोशनी और कॉर्निया को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

बैक्टीरिया और क्लोरीन का दोहरा जोखिम

यदि स्विमिंग पूल का नियमित रखरखाव और सफाई न की जाए, तो वह विभिन्न हानिकारक बैक्टीरिया और एडेनोवायरस (Adenovirus) जैसे वायरस का प्रजनन केंद्र बन जाता है। जब बच्चे पानी के भीतर आंखें खोलते हैं, तो ये सूक्ष्मजीव सीधे कंजंक्टिवा के संपर्क में आ जाते हैं।

इसके अतिरिक्त, पानी को साफ रखने के लिए उपयोग किए जाने वाले क्लोरीन की अत्यधिक मात्रा भी नुकसानदेह साबित होती है। क्लोरीन आंखों की प्राकृतिक सुरक्षात्मक आंसू परत (Tear Film) को धो देता है, जिससे आंखों में सूखापन, तेज जलन और लालिमा पैदा हो जाती है। इसके अलावा बच्चों के बीच तौलिया, कैप या गॉगल्स साझा करने से यह संक्रमण एक से दूसरे बच्चे में तेजी से फैलता है।

इन प्रमुख लक्षणों को न करें नजरअंदाज

स्विमिंग के बाद यदि बच्चे की आंखों में संक्रमण हो जाए, तो ये संकेत नजर आते हैं:

  • आंखों के सफेद हिस्से का गहरा गुलाबी या लाल हो जाना।

  • लगातार खुजली, जलन या आंख के अंदर बाल/कण चुभने जैसा अहसास।

  • अत्यधिक पानी गिरना या गाढ़ा पीला-सफेद चिपचिपा स्राव निकलना।

  • सुबह सोकर उठने पर पलकों का आपस में चिपक जाना।

  • तेज रोशनी के प्रति संवेदनशीलता (फोटोफोबिया), पलकों में सूजन या हल्का धुंधला दिखना।

आंखों की हिफाजत के लिए 5 जरूरी सावधानियां

  1. स्विमिंग गॉगल्स अनिवार्य करें: बच्चों को कभी भी बिना अच्छी गुणवत्ता वाले प्रोटेक्टिव गॉगल्स के पानी में न उतरने दें। यह आंखों और पानी के बीच एक सुरक्षित दीवार का काम करता है।

  2. साफ पूल का चयन: हमेशा उसी स्विमिंग पूल का चयन करें जहां पानी के क्लोरीनेशन और फिल्ट्रेशन मानकों का सख्ती से पालन होता हो।

  3. पर्सनल सामान शेयर न करें: बच्चों को समझाएं कि वे अपना तौलिया, स्विम कैप और गॉगल्स किसी दूसरे साथी के साथ बिल्कुल साझा न करें।

  4. कॉन्टैक्ट लेंस उतारें: यदि बड़े बच्चे कॉन्टैक्ट लेंस लगाते हैं, तो स्विमिंग से पहले उन्हें हटा दें; लेंस पानी के बैक्टीरिया को ट्रैप करके गंभीर कॉर्नियल अल्सर बना सकते हैं।

  5. नहाने के तुरंत बाद फ्रेश वाटर वॉश: स्विमिंग खत्म होते ही बच्चों की आंखों और चेहरे को नल के साफ, ताजे पानी से अच्छी तरह धुलवाएं ताकि क्लोरीन का असर खत्म हो सके।

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