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चीन चुरा सकता है F-35 की तकनीक! सऊदी अरब की डील पर अमेरिका को डर

अमेरिकी खुफिया एजेंसी डीआईए (DIA) की गोपनीय रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि सऊदी अरब को 48 F-35 स्टील्थ जेट मिलने पर चीन उसकी अत्याधुनिक एवियोनिक्स और स्टील्थ तकनीक चुरा सकता है।
चीन के डर से फंसी डील!

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Riyadh/Washington: मध्य पूर्व में बड़े रक्षा सौदों को लेकर जारी कूटनीतिक रस्साकशी के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (डीआईए) की एक गोपनीय रिपोर्ट में यह गंभीर चिंता जताई गई है कि यदि अमेरिका सऊदी अरब को 48 अत्याधुनिक एफ-35 (F-35) स्टील्थ फाइटर जेट्स बेचने के प्रस्ताव पर आगे बढ़ता है, तो चीन उसकी संवेदनशील सैन्य तकनीक में सेंध लगा सकता है। इसी डर के चलते वाशिंगटन फिलहाल रियाद को यह पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट सौंपने से बचता नजर आ रहा है।

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तकनीक चोरी और सऊदी-चीन की बढ़ती नजदीकी

खुफिया आकलन के अनुसार, सऊदी अरब और चीन के बीच तेजी से गहरे होते रक्षा व तकनीकी संबंध पेंटागन के लिए सिरदर्द बन चुके हैं। एफ-35 विमान अत्याधुनिक स्टील्थ क्षमता, एडवांस्ड रडार, आधुनिक सेंसर्स और गोपनीय डेटा-शेयरिंग सिस्टम से लैस हैं। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों को अंदेशा है कि सऊदी सैन्य तंत्र में चीनी तकनीकी उपकरणों और कर्मियों की मौजूदगी के चलते एफ-35 के गोपनीय एवियोनिक्स कोड और उड़ान क्षमताओं की जानकारियां बीजिंग तक पहुंच सकती हैं। उल्लेखनीय है कि चीन पूर्व में रियाद को बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताएं विकसित करने में तकनीकी सहयोग दे चुका है, जिससे वाशिंगटन का शक और गहरा गया है।

इजरायल की रणनीतिक बढ़त (QME) पर सवाल

इस संभावित सौदे के सामने दूसरी बड़ी चुनौती मध्य पूर्व में इजरायल की सैन्य श्रेष्ठता बनाए रखने का नियम है। अमेरिकी कानून (2008) के तहत वाशिंगटन पर यह बाध्यता है कि क्षेत्र में इजरायल की ‘क्वालिटेटिव मिलिट्री एज’ (QME) हर हाल में सुरक्षित रहनी चाहिए। वर्तमान में पूरे मिडिल ईस्ट में केवल इजरायल ही एफ-35 का विशेष कस्टमाइज्ड संस्करण (F-35I ‘अदिर’) संचालित करता है। सऊदी अरब को यह विमान मिलने से क्षेत्र का शक्ति संतुलन प्रभावित होने की आशंका है, जिसका इजरायल लगातार विरोध करता रहा है।

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यूएई जैसी स्थिति और कड़े सुरक्षा प्रतिबंध

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति बिल्कुल वैसी ही है जैसी कुछ साल पहले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ एफ-35 सौदे के दौरान बनी थी। उस समय यूएई के 5जी नेटवर्क और बुनियादी ढांचे में चीनी कंपनियों (जैसे हुआवेई) की भागीदारी के कारण अमेरिका ने जेट्स की डिलीवरी पर रोक लगा दी थी। यदि अमेरिका सऊदी अरब के साथ इस समझौते को आगे बढ़ाता भी है, तो इसमें तकनीक तक पहुंच सीमित करने की बेहद कड़ी शर्तें शामिल होंगी। अधिकारियों का स्पष्ट रुख है कि यदि तकनीक लीक होने का रत्ती भर भी जोखिम दिखा, तो अमेरिका इस अरबों डॉलर के सौदे को रद्द करने से पीछे नहीं हटेगा।

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