सारण: बिहार के जलालपुर की आनंदी देवी की कहानी महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई है। कभी छोटी सी गुमटी से करीब 2 हजार रुपये महीने की कमाई करने वाली आनंदी देवी आज हर महीने 60 से 65 हजार रुपये तक कमा रही हैं। उनके कारोबार से 10 से 12 अन्य जीविका दीदियों को भी रोजगार मिल रहा है।
आनंदी देवी वर्ष 2017 में जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। इसके बाद उन्होंने समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर अपनी किराना दुकान का विस्तार किया। उन्होंने दुकान पर अचार, भुजा और अन्य खाद्य उत्पादों की बिक्री शुरू की।
अचार और सत्तू ने बढ़ाया कारोबार
आनंदी देवी अब आम, आंवला, लहसुन, कटहल और मशरूम के अचार के साथ भुजा, बेसन और सत्तू भी तैयार कर बेचती हैं। उनके उत्पादों की मांग सारण के अलावा उत्तर प्रदेश के बलिया और देवरिया तक है।
मेलों से मिला बड़ा बाजार
आनंदी देवी के अनुसार, पटना सरस मेला और सोनपुर मेला में उत्पादों की बिक्री से उन्हें हर बार करीब 3 से 3.50 लाख रुपये तक का कारोबार करने का मौका मिलता है। इन मेलों से उनके उत्पादों को नए ग्राहक और बड़ा बाजार मिला है।
बढ़ती मांग को देखते हुए आनंदी देवी अब अकेले काम नहीं करतीं। वह 10 से 12 जीविका दीदियों को अपने कारोबार से जोड़कर उन्हें रोजगार दे रही हैं।
आनंदी देवी की सफलता की कहानी बताती है कि सही अवसर, मेहनत और सहयोग मिले तो छोटी शुरुआत भी बड़े कारोबार में बदल सकती है। जीविका से जुड़कर उन्होंने न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी रोजगार का रास्ता खोला है।



