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एक रात में करोड़ों के हथियार स्वाहा! ईरानी हमले से थर्राया अमेरिकी एयरबेस, उड़े फाइटर जेट्स के परखच्चे

जॉर्डन स्थित मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस पर हुए ईरानी हमले में अमेरिकी सेना को भारी नुकसान हुआ है, जहां कई F-15 और A-10 लड़ाकू विमान क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
ईरानी हमला अमेरिकी एयरबेस

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Washington, USA: जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस पर रात के समय हुए ईरानी हमले में अमेरिकी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में कई अमेरिकी सैन्य विमानों को गंभीर क्षति पहुंची है।

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मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस पर हमला

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी हमले के दौरान एक ए-10 थंडरबोल्ट विमान का एक पंख टूटकर अलग हो गया, जबकि लगभग आठ एफ-15 लड़ाकू विमानों को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, अधिकांश क्षतिग्रस्त विमानों को जल्द ही मरम्मत के बाद सैन्य अभियान के लिए तैयार कर लिया गया। इस हमले को विफल करने के लिए अमेरिकी सैनिकों ने ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को रोकने के लिए 30 से अधिक पैट्रियट मिसाइलों का इस्तेमाल किया।

अमेरिकी एयर डिफेंस पर भारी दबाव

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 60 ईरानी मिसाइलें अमेरिकी एयरबेस तक पहुंचीं और उन्होंने वहां मौजूद अमेरिकी विमानों को निशाना बनाया। इस दौरान अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को काफी सक्रिय रहना पड़ा। पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम की मिसाइलें काफी महंगी होती हैं, ऐसे में ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने में अमेरिका को एक ही रात में करोड़ों के हथियारों का इस्तेमाल करना पड़ा।

ईरान और अमेरिका के दावे

ईरान ने दावा किया है कि उसके हमले में अमेरिकन एयरफोर्स के एफ-15, एफ-16 और एफ-35 फाइटर जेट को नुकसान पहुंचा है। हालांकि अमेरिका और जॉर्डन दोनों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था, लेकिन अब रिपोर्ट में आठ एफ-15 और एक ए-10 थंडरबोल्ट विमान के क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि की गई है। अमेरिकी रिपोर्ट में एफ-35 का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन ईरान अपने दावे पर कायम है।

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दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव

यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले से पहले अमेरिका ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को निशाना बनाया था। यह कार्रवाई ईरान की ओर से अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को निशाना बनाए जाने के जवाब में की गई थी। इसके बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया था, जिसके परिणाम अब अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में सामने आ रहे हैं। इस घटना ने क्षेत्र में दोनों देशों के बीच जारी तनाव को और बढ़ा दिया है।

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