Health Adda: काम से जुड़ा तनाव, असंतुलित जीवनशैली और नौकरी की परेशानियां नींद की गुणवत्ता के साथ मानसिक और शारीरिक सेहत को भी प्रभावित कर सकती हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के शोधकर्ताओं के अध्ययन में करीब 70 प्रतिशत प्रतिभागियों में ऐसी नींद की समस्या पाई गई, जिसे चिकित्सकीय रूप से गंभीर माना जा सकता है।
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अध्ययन में शामिल किसी भी व्यक्ति के पहले से स्लीप डिसऑर्डर का ज्ञात इतिहास नहीं था। वहीं, अध्ययन के दौरान करीब 92 प्रतिशत प्रतिभागियों में कम से कम एक बार नींद संबंधी समस्या के मानक पूरे पाए गए।
काम का तनाव और नींद के बीच संबंध
शोधकर्ताओं के अनुसार, नींद की समस्या को केवल उम्र बढ़ने से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। काम का दबाव और तनाव भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अध्ययन में बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस और नौकरी से संतुष्टि बताने वाले लोगों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर पाया गया। इसके विपरीत, काम के दौरान लगातार तनाव, चिड़चिड़ापन या उदासी महसूस करने वाले प्रतिभागियों में स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां ज्यादा देखी गईं।
पर्याप्त नींद के बाद भी क्यों नहीं मिला आराम?
इस अध्ययन में 50 से 66 वर्ष की उम्र के 45 कर्मचारियों को शामिल किया गया था। ये लोग अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे थे और शोधकर्ताओं ने करीब एक साल तक उनकी निगरानी की। इस दौरान प्रतिभागियों से स्वास्थ्य, काम और जीवनशैली से जुड़े सवाल पूछे गए। उनकी नींद का रिकॉर्ड तैयार करने के लिए स्मार्टवॉच और अन्य पहनने वाले सेंसर का भी इस्तेमाल किया गया।
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रात में बार-बार टूट रही थी नींद
अध्ययन में शामिल ज्यादातर लोग रात में 6.5 से 8 घंटे तक सो रहे थे। इसके बावजूद कई लोगों को सुबह उठने के बाद पूरी तरह आराम महसूस नहीं होता था। शोध के अनुसार, समस्या सिर्फ कम सोने की नहीं थी। रात में बार-बार नींद टूटने और नींद की गुणवत्ता खराब होने का भी इसमें योगदान था। स्मार्टवॉच से मिले आंकड़ों में करीब 90 प्रतिशत प्रतिभागियों में अध्ययन के दौरान नींद में रुकावट देखी गई।
काम और जीवनशैली का भी असर
शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कौन से कारक नींद और स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। इसमें काम से जुड़े अनुभव महत्वपूर्ण कारणों में सामने आए। यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग बिजनेस स्कूल की डॉ. बेलिंडा स्टेफन ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ होने वाले प्राकृतिक बदलावों के अलावा आर्थिक चिंताएं, परिवार की जिम्मेदारियां और काम का तनाव भी नींद को प्रभावित कर सकते हैं।
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