Patna: इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS), पटना के चिकित्सकों ने अन्ननली (इसोफेगस) कैंसर से पीड़ित दो मरीजों का अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव (लेप्रोस्कोपिक-थोरेकोस्कोपिक) तकनीक से सफल ऑपरेशन किया है। संस्थान के चिकित्सकों के अनुसार, दोनों जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए गए और मरीजों की स्थिति अब अच्छी है।
भागलपुर के 53 वर्षीय मरीज का लेप्रोस्कोपिक-थोरेकोस्कोपिक ऑपरेशन
पहले मरीज मोहम्मद शहनवाज खान (53 वर्ष) भागलपुर के निवासी हैं। उन्हें अन्ननली के कैंसर का निदान हुआ था। उन्हें ऑपरेशन के लिए दिल्ली जाने की सलाह दी गई थी, लेकिन आर्थिक कारणों के चलते उन्होंने इलाज के लिए आईजीआईएमएस, पटना का रुख किया। उन्होंने गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी विभाग के अतिरिक्त प्राध्यापक डॉ. साकेत कुमार से परामर्श लिया। आवश्यक जांच और तैयारी के बाद उनका पूर्णतः लेप्रोस्कोपिक-थोरेकोस्कोपिक इसोफेगेक्टॉमी के माध्यम से सफल ऑपरेशन किया गया। इस प्रक्रिया के दौरान कैंसरग्रस्त अन्ननली को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति लगातार अच्छी रही और उन्हें आठवें पोस्ट-ऑपरेटिव दिन स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
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वैशाली की 34 वर्षीय मरीज का भी सफल ऑपरेशन
दूसरी मरीज सुश्मिता कुमारी (34 वर्ष) वैशाली की रहने वाली हैं। उन्हें अन्ननली का बड़ा कैंसर था। उनका प्रारंभिक उपचार आईजीआईएमएस के स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के जरिए किया गया। उपचार के बाद ट्यूमर का आकार कम हुआ, जिसके बाद उन्हें ऑपरेशन के लिए डॉ. साकेत कुमार के पास भेजा गया। विस्तृत जांच के बाद उनका भी मिनिमली इनवेसिव तकनीक से सफल ऑपरेशन किया गया। चिकित्सकों के अनुसार, कैंसर को पूरी तरह निकाल दिया गया है। वर्तमान में सुश्मिता कुमारी की स्थिति अच्छी है और शीघ्र ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
क्या है अन्ननली का कैंसर?
अन्ननली का कैंसर गंभीर और जानलेवा कैंसरों में से एक है। समय पर इसका पता नहीं चलने पर इससे होने वाली मृत्यु दर काफी अधिक हो सकती है। यह सामान्यतः अधिक उम्र के लोगों में देखा जाता है, हालांकि कम उम्र के मरीज भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।
इस कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं—
- धूम्रपान
- शराब का सेवन
- मिलावटी एवं हानिकारक खाद्य पदार्थों का सेवन
- लंबे समय तक एसिड रिफ्लक्स (GERD)
- मोटापा
इस बीमारी का सबसे प्रमुख लक्षण खाना निगलने में लगातार बढ़ती कठिनाई है। इसके अलावा मरीजों में तेजी से वजन कम होना, कमजोरी और कभी-कभी सीने में दर्द भी हो सकता है। समय पर पहचान और उचित उपचार से इस बीमारी का सफल इलाज संभव है।
इन डॉक्टरों की टीम ने किया ऑपरेशन
दोनों जटिल ऑपरेशनों को डॉ. साकेत कुमार, डॉ. संजय कुमार, डॉ. तुषार पटेल, डॉ. नेत्रानंद और डॉ. दानिश ने सफलतापूर्वक संपन्न किया। ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विभाग की टीम भी शामिल रही, जिसका नेतृत्व डॉ. अखिलेश्वर ने किया। संस्थान के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष मंडल ने कहा कि आईजीआईएमएस में अब कैंसर की जटिल सर्जरी के लिए लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक दोनों तकनीकें अत्यंत किफायती लागत पर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं के उपलब्ध होने से बिहार और आसपास के राज्यों के मरीजों को उच्चस्तरीय कैंसर उपचार के लिए दूसरे राज्यों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
संस्थान के अधिकारियों ने टीम को दी बधाई
आईजीआईएमएस के उप निदेशक (प्रशासन) डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने दोनों मरीजों के सफल उपचार और बेहतर परिणाम के लिए चिकित्सकों एवं पूरी टीम को बधाई दी। वहीं, आईजीआईएमएस के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार ने दोनों मरीजों के सफल उपचार पर पूरी सर्जिकल, ऑन्कोलॉजी, एनेस्थीसिया और नर्सिंग टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि संस्थान उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण कैंसर उपचार उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रतिबद्ध है।





