Patna: बिहार सरकार ने जन्म से छह वर्ष तक के बच्चों में विकास संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के लिए नई पहल शुरू की है। समाज कल्याण विभाग की संस्था ‘सक्षम’ ने समेकित क्षेत्रीय पुनर्वास केंद्र (सीआरसी) और राज्य स्वास्थ्य समिति के सहयोग से मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) तैयार की है। इसके तहत राज्य के बुनियाद केंद्रों को बच्चों की शुरुआती जांच, परामर्श, उपचार और पुनर्वास से जोड़ा जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत क्या होगा?
आईसीडीएस निदेशक-सह-सक्षम की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. प्रीति ने बताया कि कई बच्चों में विकास संबंधी समस्याएं शुरुआती उम्र में ही दिखाई देती हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में उपचार देर से शुरू हो पाता है। नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसी समस्याओं की समय रहते पहचान कर आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराना है।
एसओपी किन बिंदुओं पर आधारित है?
नई मानक कार्यप्रणाली तीन प्रमुख आयामों पर आधारित है। पहले चरण में विकास संबंधी देरी और विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं से प्रभावित बच्चों की शीघ्र पहचान तथा शुरुआती हस्तक्षेप किया जाएगा। दूसरे चरण में स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर बच्चों को चिकित्सीय और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ा जाएगा। तीसरे चरण में बुनियाद केंद्रों के माध्यम से इन सेवाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत दिव्यांगता, स्वलीनता (ऑटिज्म), मस्तिष्क पक्षाघात, सुनने में कठिनाई, एक से अधिक प्रकार की दिव्यांगता और मांसपेशियों से जुड़ी गंभीर बीमारियों से प्रभावित बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही अभिभावकों को भी बच्चों की विशेष आवश्यकताओं और देखभाल के संबंध में प्रशिक्षित एवं जागरूक किया जाएगा।
मौजूदा व्यवस्था से कैसे मिलेगा लाभ?
राज्य में स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला स्तरीय शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र पहले से संचालित हैं। इसके अलावा पटना स्थित समेकित क्षेत्रीय पुनर्वास केंद्र (सीआरसी) में भी विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं से प्रभावित बच्चों के लिए विशेष सेवाएं उपलब्ध हैं। अब इन सेवाओं को बुनियाद केंद्रों से जोड़कर बच्चों तक समय पर सहायता पहुंचाने की योजना बनाई गई है।
बैठक में किन संस्थाओं ने दिए सुझाव?
इस पहल को लेकर आयोजित बैठक में बुनियाद केंद्रों के माध्यम से शीघ्र पहचान और हस्तक्षेप सेवाएं शुरू करने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में आईजीआईएमएस, राज्य स्वास्थ्य समिति, यूनिसेफ, समेकित क्षेत्रीय पुनर्वास केंद्र, आरईएफ, आईसीडीएस और जीविका के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव भी दिए।





