रांची। भारतीय वन सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी राजीव लोचन बख्शी झारखंड के प्रशासनिक हलकों में एक महत्वपूर्ण पहचान रखते हैं। वर्तमान में झारखंड सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) में विशेष सचिव तथा निदेशक के पद पर कार्यरत राजीव लोचन बख्शी राज्य सरकार की नीतियों, योजनाओं और संवाद प्रबंधन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वन प्रशासन के अनुभव से लेकर मीडिया प्रबंधन के जटिल दायित्वों तक, उनका प्रशासनिक करियर विविधतापूर्ण और महत्वपूर्ण रहा है।
सेवा पृष्ठभूमि एवं वन विभाग में योगदान
राजीव लोचन बख्शी भारतीय वन सेवा (IFS) कैडर के अधिकारी हैं। वन विभाग में अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने मुख्य वन संरक्षक (Chief Conservator of Forests – CCF) स्तर के दायित्वों का निर्वहन किया है। वन प्रशासन एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनकी मुख्य जिम्मेदारियों में झारखंड सहभागी वन प्रबंधन परियोजना (Jharkhand Participatory Forest Management Project) का सफल संचालन शामिल रहा है।
परियोजना निदेशक के रूप में उन्होंने स्थानीय समुदायों की भागीदारी से वनों के संवर्धन और आजीविका विकास के मॉडल को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वन विभाग में विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर सेवाएं देते हुए उन्होंने पर्यावरणीय संतुलन, वन संपदा के संरक्षण और समुदाय-आधारित वानिकी पहलों को दिशा दी।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में भूमिका
वर्ष 2021 में राज्य सरकार द्वारा एक प्रशासनिक फेरबदल के तहत राजीव लोचन बख्शी की सेवाएं वन एवं पर्यावरण विभाग से वापस लेकर उन्हें पुनः सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) का निदेशक नियुक्त किया गया। यह उनका इस पद पर पहला कार्यकाल नहीं था, इससे पूर्व भी वे विभिन्न कार्यकालों में जनसंपर्क विभाग के प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके उपरांत वे विभाग में विशेष सचिव का दायित्व भी संभाल रहे हैं।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के शीर्ष अधिकारी के रूप में उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं:
सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार: राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और नीतियों को आम जनता तक पारदर्शी एवं प्रभावी तरीके से पहुंचाना।
विज्ञापन एवं मीडिया नीति: विज्ञापन नीति का सुचारू कार्यान्वयन और राज्य के प्रेस व डिजिटल मीडिया के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करना।
प्रेस ब्रीफिंग व जनसंपर्क अभियान: मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद और विभिन्न सरकारी विभागों के महत्वपूर्ण आयोजनों, प्रेस कॉन्फ्रेंसों तथा राज्यस्तरीय अभियानों की रूपरेखा तैयार करना।
डिजिटल मीडिया प्रबंधन: पारंपरिक प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ डिजिटल एवं सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए सरकारी सूचनाओं का त्वरित प्रसार।
राजकीय कार्यक्रमों एवं मीडिया समन्वय में उपस्थिति
राज्य के सर्वोच्च नीतिगत और प्रशासनिक आयोजनों में राजीव लोचन बख्शी की उपस्थिति नियमित रही है। मुख्यमंत्री सचिवालय एवं मंत्रिपरिषद के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जनहित से जुड़ी जानकारियों को प्रामाणिक रूप से मीडिया के समक्ष प्रस्तुत करने में उनकी विभागीय टीम की प्रमुख भूमिका रहती है। जनसंपर्क तंत्र को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और सुशासन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में उनकी कार्यशैली को देखा गया है।
राजनीतिक आरोप एवं निष्पक्ष मूल्यांकन
दिसंबर 2025 में विपक्ष के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी द्वारा राजीव लोचन बख्शी के कार्यकाल और विभागीय कामकाज से जुड़े कुछ विषयों पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की गई थी। यह एक राजनीतिक पटल पर उठाया गया मुद्दा था। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक अभिलेखों के अनुसार, इन आरोपों के संबंध में किसी भी जांच एजेंसी या न्यायालय द्वारा कोई दोष सिद्ध नहीं हुआ है और न ही कोई दंडात्मक निष्कर्ष सामने आया है। प्रशासनिक और विधिक दृष्टिकोण से ऐसे विषयों को केवल राजनीतिक आरोपों के रूप में ही देखा जाता है जब तक कि आधिकारिक तौर पर कोई प्रशासनिक या न्यायिक पुष्टि न हो।
प्रशासनिक अनुभव का सार
झारखंड जैसे विविधतापूर्ण राज्य में वन प्रशासन के व्यावहारिक अनुभव के साथ-साथ राज्य सरकार के केंद्रीय सूचना तंत्र को संभालने का उनका अनुभव उन्हें एक कुशल प्रशासक के रूप में स्थापित करता है। नीति निर्माण, जनसंवाद और मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में उनका योगदान झारखंड सरकार के प्रशासनिक ढांचे का एक महत्वपूर्ण अंग बना हुआ है।




