ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’ का असर: भारत पर 10% अतिरिक्त शुल्क लागू

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत भारत पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है, जिससे टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।

New Delhi: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका First’ नीति के तहत लिए गए नए फैसले ने भारतीय निर्यातकों और व्यापारिक जगत की हलचल बढ़ा दी है। अमेरिका द्वारा सेक्शन 301 के तहत भारत पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा से भारतीय वस्तुओं का अमेरिकी बाजार में मुकाबला करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह फैसला मुख्य रूप से जबरन मजदूरी (फॉर्र्स्ड लेबर) से जुड़े वैश्विक उत्पादन को नियंत्रित करने के तर्क के साथ लागू किया गया है।

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ट्रंप प्रशासन ने क्यों लगाया अतिरिक्त शुल्क?

अमेरिकी ट्रेड एक्ट 1974 का सेक्शन 301 अमेरिका को उन देशों पर आर्थिक पाबंदियां लगाने का अधिकार देता है, जिनकी नीतियां उसके उद्योगों के लिए नुकसानदेह मानी जाती हैं। इस बार ट्रंप प्रशासन ने श्रम मानकों और अनुचित उत्पादन लागत को मुद्दा बनाते हुए भारत समेत 60 से अधिक देशों पर अतिरिक्त शुल्क थोपा है। हालाँकि, अमेरिका ने माना है कि भारत ने श्रम सुधारों के लिए कानूनी कदम उठाए हैं, इसीलिए उसे चीन, ब्रिटेन और जापान (जिन पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगा है) की तुलना में 10 प्रतिशत की कम शुल्क वाली श्रेणी में रखा गया है।

किन भारतीय उद्योगों पर पड़ेगा असर?

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ का सबसे बड़ा असर भारत के श्रम-आधारित क्षेत्रों जैसे टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और हस्तशिल्प पर पड़ेगा। अमेरिका में भारतीय सामान महंगा होने से निर्यात में कमी आ सकती है, जिससे घरेलू विनिर्माण और रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है। इसके अलावा, भारत की सूची में पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देश भी शामिल हैं, जिससे इस पूरे क्षेत्र के निर्यात व्यापार पर दबाव बढ़ेगा।

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चीन के मुकाबले भारत को राहत की उम्मीद

भारत के लिए राहत की बात केवल यह है कि चीन जैसे बड़े प्रतिस्पर्धी देश पर 12.5 प्रतिशत का अधिक शुल्क लगा है, जिससे भारतीय वस्तुओं को कुछ हद तक सापेक्षिक बढ़त मिल सकती है। फिर भी, निर्यातकों के बढ़ते नुकसान को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि भारत सरकार जल्द ही अमेरिकी प्रशासन के साथ इस मामले पर कूटनीतिक और व्यापारिक बातचीत शुरू करेगी ताकि भारतीय उद्योगों को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।

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