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लोयाबाद पीसीसी सड़क निर्माण में अनियमितता का आरोप, जांच की उठी मांग

धनबाद के लोयाबाद वार्ड-08 में पीसीसी सड़क निर्माण कार्य में गुणवत्ता और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के जिला अध्यक्ष रत्नेश कुमार ने झारखंड के मुख्य सचिव से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

Dhanbad: धनबाद नगर निगम के लोयाबाद वार्ड संख्या-08 में पीसीसी सड़क निर्माण कार्य को लेकर अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के जिला अध्यक्ष रत्नेश कुमार ने झारखंड के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

निर्माण कार्य में अनियमितता का आरोप

रत्नेश कुमार ने आरोप लगाया है कि लोयाबाद वार्ड-08 में ठेकेदार संजय कुमार सिंह को नगर निगम की ओर से करीब 83.72 लाख रुपये की लागत से पीसीसी सड़क निर्माण कार्य आवंटित किया गया था। उनके अनुसार, बीजीएस हाई स्कूल के पीछे सहित अन्य स्थानों पर कराए गए निर्माण कार्य में गुणवत्ता और वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं।

शिकायत में दावा किया गया है कि सड़क निर्माण में मानक के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। आरोप है कि घटिया गुणवत्ता का सीमेंट, बालू और गिट्टी इस्तेमाल की गई, जिसके कारण पहली बारिश में ही सड़क की स्थिति खराब होने लगी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि कई जगह सड़क टूटने लगी है और सतह पर सीमेंट की जगह केवल बालू और गिट्टी दिखाई दे रही है।

मोटाई और निरीक्षण पर भी उठाए सवाल

पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि जहां सड़क की ढलाई 8 इंच मोटी होनी थी, वहां केवल 4 इंच ढलाई की गई। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि यदि सड़क की जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

इसके अलावा आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य के दौरान वार्ड-08 के संबंधित जेई ने एक बार भी स्थल का निरीक्षण नहीं किया। शिकायत में इसे ठेकेदार और जेई की कथित मिलीभगत का संकेत बताया गया है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मिट्टी की जगह कचरा भरने का भी आरोप

रत्नेश कुमार ने आरोप लगाया कि जहां सड़क क्षतिग्रस्त हुई है, वहां मरम्मत के नाम पर मिट्टी की जगह कचरा मिश्रित सामग्री डाली जा रही है। उन्होंने दावा किया कि इसके प्रमाण भी उनके पास मौजूद हैं।

उन्होंने राज्य सरकार, धनबाद के उपायुक्त और नगर निगम के महापौर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है। साथ ही मांग की है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित ठेकेदार और जेई के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग पर रोक लग सके।

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