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रांची: झारखंड उच्च न्यायालय में शुक्रवार को राज्य के चर्चित अधिवक्ता महेश तिवारी की याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। यह याचिका रांची सिविल कोर्ट द्वारा उनकी सजा पर रोक लगाने संबंधी अपील को खारिज किए जाने के खिलाफ दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए महेश तिवारी को इस संबंध में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 जून 2026 की तारीख मुकर्रर की है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई। सरकार के वकील ने अदालत के समक्ष दलील दी कि महेश तिवारी द्वारा दायर यह याचिका कानूनी तौर पर सुनवाई योग्य (मेंटेनेबल) ही नहीं है। सरकार का मुख्य तर्क यह था कि याचिकाकर्ता ने केवल सजा पर रोक लगाने संबंधी अंतरिम आवेदन (आईए) के खारिज होने के आदेश को चुनौती दी है, जो विधिक (कानूनी) मानदंडों के तहत विचारणीय नहीं मानी जा सकती। राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद न्यायालय ने महेश तिवारी को सरकार की इस आपत्ति पर अपना प्रत्युत्तर (जवाब) दाखिल करने को कहा। कोर्ट में सरकार की तरफ से विशेष लोक अभियोजक विनीत कुमार वशिष्ठ ने पैरवी की।
क्या है मामले की पृष्ठभूमि?
इस विवाद की शुरुआत रांची सिविल कोर्ट से हुई थी, जहां के प्रधान न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने महेश तिवारी की सजा पर रोक लगाने संबंधी मिसलेनियस अपील को सीधे तौर पर खारिज कर दिया था। इसके साथ ही, सिविल कोर्ट ने उनकी मूल दोषसिद्धि के खिलाफ दायर मुख्य अपील को सुनवाई के लिए अपर न्यायायुक्त कुलदीप की अदालत में ट्रांसफर कर दिया था। इसके बाद महेश तिवारी ने कानूनी राहत पाने और अपनी दो साल की सजा पर रोक लगवाने के उद्देश्य से उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
महिला अधिवक्ता से मारपीट का है मामला
उल्लेखनीय है कि यह पूरा विवाद झारखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता महेश तिवारी और राज्य की वरिष्ठ महिला अधिवक्ता ऋतु कुमार के बीच हुए विवाद से जुड़ा है। रांची सिविल कोर्ट के न्यायिक दंडाधिकारी (ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट) की अदालत ने महेश तिवारी को महिला अधिवक्ता ऋतु कुमार के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार करने के मामले में दोषी पाया था। दोष सिद्ध होने के बाद अदालत ने उन्हें दो वर्ष के कारावास (जेल) की सजा सुनाई थी। अब 25 जून को होने वाली सुनवाई में हाईकोर्ट इस बात पर फैसला करेगा कि यह याचिका आगे सुनवाई के लिए स्वीकार की जाएगी या नहीं।

