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आदिवासी अधिकारों पर आयोग सख्त, भू-माफियाओं और लापरवाह अफसरों की खैर नहीं

रांची: झारखंड में आदिवासियों की जमीन और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए बना CNT Act केवल कागजों तक सीमित रह गया है? यह गंभीर सवाल राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NSTC) की तीन दिवसीय सुनवाई के बाद खड़ा हुआ है। सर्किट हाउस में संपन्न हुई

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रांची: झारखंड में आदिवासियों की जमीन और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए बना CNT Act केवल कागजों तक सीमित रह गया है? यह गंभीर सवाल राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NSTC) की तीन दिवसीय सुनवाई के बाद खड़ा हुआ है। सर्किट हाउस में संपन्न हुई इस महत्वपूर्ण जनसुनवाई के बाद आयोग की सदस्य आशा लकड़ा ने प्रेस वार्ता में राज्य की मशीनरी और भू-माफियाओं के गठजोड़ पर तीखा प्रहार किया।

जमीन विवाद और सीएनटी एक्ट का उल्लंघन

आशा लकड़ा ने बताया कि तीन दिनों के भीतर कुल 66 मामलों की गहन सुनवाई की गई। चौंकाने वाली बात यह है कि रांची सहित पूरे प्रदेश में जमीन से जुड़े ज्यादातर मामलों में सीएनटी एक्ट का सरेआम उल्लंघन पाया गया है। विशेषकर रांची के बुकरू (चामा गांव) के मामलों ने आयोग को हैरान कर दिया, जहाँ आदिवासी परिवारों को डरा-धमकाकर उनकी पुश्तैनी जमीनें छीनी जा रही हैं। आयोग ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए रांची उपायुक्त  और एसएसपी को निर्देश दिया है कि दोषियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर वारंट जारी करें और चार्जशीट दाखिल कर आयोग को सूचित करें।

अस्पताल के नाम पर अनियमितता और स्वास्थ्य की लाचारी

राजधानी के हरमू इलाके में स्थित एक अस्पताल भी आयोग के रडार पर है। जांच में पाया गया कि नगर निगम से नक्शा तो आवासीय भवन का पास कराया गया था, लेकिन वहां अस्पताल चल रहा है। आयोग ने जमीन की वंशावली के सत्यापन के आदेश दिए हैं।

वहीं, चाईबासा की उस हृदयविदारक घटना पर भी आयोग ने गहरी नाराजगी जताई, जहाँ एम्बुलेंस न मिलने के कारण एक पिता अपने बच्चे के शव को थैले में रखकर 60 किलोमीटर दूर ले जाने को मजबूर हुआ। आशा लकड़ा ने स्वास्थ्य विभाग को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी अमानवीय घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए। विभाग को निर्देश दिया गया है कि एम्बुलेंस की कमी को दूर करने के लिए एनजीओ के साथ एमओयू करें ताकि राज्य के हर कोने में सुविधा पहुंचे।

66 में से 15 मामलों का मौके पर समाधान

आयोग ने केवल निर्देश ही नहीं दिए, बल्कि 15 मामलों का मौके पर ही निपटारा कर पीड़ितों को राहत पहुंचाई। शेष मामलों में सेवा संबंधी शिकायतों और अत्याचार के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को समय सीमा दी गई है।

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