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आजाद भारत की 8वीं जनगणना की तैयारी पूरी : 16 भाषाओं में पूछे जाएंगे 33 सवाल, जानें क्या है पूरा शेड्यूल

रांची: देश की 16वीं और आजाद भारत की 8वीं जनगणना को लेकर प्रशासनिक मशीनरी अब ‘एक्शन मोड’ में आ गई है। वर्ष 2011 के लंबे अंतराल के बाद होने वाली इस ऐतिहासिक जनगणना को लेकर रांची नगर निगम में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की

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रांची: देश की 16वीं और आजाद भारत की 8वीं जनगणना को लेकर प्रशासनिक मशीनरी अब ‘एक्शन मोड’ में आ गई है। वर्ष 2011 के लंबे अंतराल के बाद होने वाली इस ऐतिहासिक जनगणना को लेकर रांची नगर निगम में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई। मेयर रोशनी खलखो ने बताया कि इस बार की जनगणना न केवल डिजिटल होगी, बल्कि केंद्र सरकार ने पहली बार देशवासियों को ‘सेल्फ-इन्यूमरेशन’ यानी खुद से अपना डेटा भरने का विकल्प भी दिया है।

16 मई से शुरू होगा ‘डोर-टू-डोर’ अभियान

मेयर ने स्पष्ट किया कि रांची जैसे बड़े शहर की आबादी को कवर करने के लिए 4 परगना और पर्यवेक्षक अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है। जनगणना का काम मुख्य रूप से दो चरणों में होगा। 16 मई से परगना कर्मी हर घर की दहलीज पर पहुंचेंगे। ये कर्मी लोगों के पहचान पत्र लेकर डिजिटल माध्यम से कॉलम 1 से 3 की जानकारी भरेंगे। इससे पहले 1 से 15 मई तक बेघरों और विभिन्न संस्थाओं की गणना की जाएगी।

स्वयं गणना के लिए 15 दिन का विशेष समय

सरकार ने आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए लोगों को सशक्त बनाया है। 1 से 15 मई तक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसके दौरान लोग ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से अपने परिवार और आवास की जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे। 16 मई से 14 जून तक मकानों के सूचीकरण का विस्तृत कार्य संपन्न किया जाएगा।

16 भाषाएं और 33 सवालों की लिस्ट

जनगणना की प्रक्रिया को समावेशी बनाने के लिए इसे 16 भाषाओं में तैयार किया गया है। यदि कहीं क्षेत्रीय भाषा की समस्या आती है, तो स्थानीय शिक्षकों को अनुवादक के रूप में नियुक्त किया जाएगा। जनगणना प्रपत्र में कुल 33 प्रश्न शामिल हैं, जो शिक्षा, आवास, आय और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े होंगे। प्रशिक्षण की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 264 प्रखंडों के 50 नगरीय अधिकारियों को पहले ही मास्टर ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

प्रशासनिक सीमाओं पर लगेगा ‘फ्रीज’

सटीक आंकड़े जुटाने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीति अपनाई है। 1 जनवरी से 31 मार्च 2027 तक राज्य की सभी प्रशासनिक सीमाएं ‘फ्रीज’ रहेंगी। इस दौरान न तो किसी नए वार्ड का गठन होगा और न ही किसी नगर निकाय की सीमा में बदलाव किया जाएगा, ताकि डेटा में कोई विसंगति न आए।

इस प्रेस वार्ता के दौरान उप महापौर नीरज कुमार, नगर आयुक्त सुशांत गौरव और जनगणना संचालन निदेशालय के संयुक्त निदेशक सत्येंद्र कुमार गुप्ता सहित कई आला अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे इस राष्ट्रीय कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और सही जानकारी साझा करें।

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