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आसमान में धमाका और काले धुएं का गुबार, सऊदी ने मार गिराई ईरानी मिसाइल

रियाद, (सऊदी अरब) | एजेंसी मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच सऊदी अरब के एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र पर ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमले के प्रयास ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। सऊदी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक,

सऊदी अरब में एक औद्योगिक केन्द्र से उठता हुआ धूआं। सऊदी अरब के अनुसार उसकी रक्षा प्रणाली ने ईरान से लागी गयी मिसाइल को हवा में ही मार गिराया।
सऊदी अरब में एक औद्योगिक केन्द्र से उठता हुआ धूआं। सऊदी अरब के अनुसार उसकी रक्षा प्रणाली ने ईरान से लागी गयी मिसाइल को हवा में ही मार गिराया।

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रियाद, (सऊदी अरब) | एजेंसी

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच सऊदी अरब के एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र पर ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमले के प्रयास ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। सऊदी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ईरान द्वारा दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को सऊदी अरब की उन्नत वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense System) ने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही हवा में सफलतापूर्वक मार गिराया। इस कार्रवाई के बाद आसमान में उठे घने काले धुएं के गुबार ने युद्ध की विभीषिका को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है।

मिसाइल हमले का यह विवरण रोंगटे खड़े करने वाला है। रात के अंधेरे में ईरान की ओर से दर्जनों मिसाइलें दागी गईं, जिन्हें रोकने के लिए सऊदी अरब ने अपनी पैट्रियट (Patriot) और थाड (THAAD) प्रणालियों को सक्रिय कर दिया था। गठबंधन बलों ने पुष्टि की है कि एक घातक मिसाइल पूर्वी प्रांत के महत्वपूर्ण ‘रास तनूरा’ औद्योगिक क्षेत्र के करीब पहुंच गई थी, लेकिन एयर डिफेंस ने उसे हवा में ही विस्फोटित कर दिया। हालांकि मलबे के गिरने से भारी धुआं उठा, लेकिन गनीमत रही कि इसमें किसी की जान नहीं गई और न ही तेल सुविधाओं को कोई बड़ा नुकसान पहुंचा है। सऊदी ने इसे “दुश्मन की बड़ी नाकामी” करार दिया है, जबकि ईरान ने इसे अपनी “प्रतिशोध” की कार्रवाई बताया है।

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इस घटना का क्षेत्रीय प्रभाव बहुत गहरा होने की आशंका है। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे महायुद्ध के इस दौर में सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कड़े हस्तक्षेप की मांग की है। हमले की खबर फैलते ही वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल के दामों में अचानक उछाल देखा गया। अमेरिकी नौसेना ने भी क्षेत्र में अपनी तैनाती बढ़ा दी है ताकि तेल व्यापार के मुख्य रास्तों को सुरक्षित रखा जा सके। स्थानीय निवासियों में इस घटना के बाद घबराहट का माहौल है, लेकिन सऊदी सरकार ने स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में होने का भरोसा दिलाया है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला संभावित युद्धविराम की घोषणा से ठीक पहले सऊदी अरब और अमेरिका को उकसाने का एक बड़ा कदम था। हालांकि सऊदी अरब की रक्षा प्रणाली की सफलता ने उनकी सैन्य क्षमता का लोहा मनवाया है, लेकिन ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का खतरा अभी भी टला नहीं है। औद्योगिक केंद्रों पर उठते धुएं के ये गुबार बताते हैं कि पश्चिम एशिया में शांति की डोर कितनी नाजुक है।

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