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Washington, (US): दुनिया को आने वाले समय में भीषण गर्मी और जलवायु संकट के एक नए दौर के लिए तैयार रहना होगा। मौसम वैज्ञानिकों और वैश्विक एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि साल 2027 दुनिया का अब तक का सबसे गर्म साल साबित हो सकता है। इसका मुख्य कारण प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ (El Niño) के बनने की प्रबल संभावना को माना जा रहा है। यदि यह अनुमान सच साबित हुआ, तो 2027 पिछले तीन वर्षों की रिकॉर्ड गर्मी को भी पीछे छोड़ देगा।
क्या है ‘अल नीनो’ और यह क्यों है खतरनाक?
अल नीनो एक ऐसी प्राकृतिक मौसमी घटना है जिसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का पानी औसत से काफी ज्यादा गर्म हो जाता है। यह गर्म पानी अमेरिकी महाद्वीप के तटों तक फैलता है, जिससे पूरी दुनिया के मौसम चक्र पर सीधा असर पड़ता है। क्लाइमेट साइंटिस्ट एंड्रयू वॉटकिंस के अनुसार, पश्चिमी ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में बहुत सारा गर्म पानी जमा हो रहा है, जो अल नीनो के सक्रिय होने का संकेत है।
वैश्विक एजेंसियों की चेतावनी
अमेरिकी सरकार के नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) और ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ मेटियोरोलॉजी ने अपने क्लाइमेट मॉडल के आधार पर अल नीनो का अनुमान लगाया है। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी पक्के तौर पर तारीख बताना जल्दबाजी होगा, लेकिन संकेत बताते हैं कि 2026 के अंत तक इसकी शुरुआत हो सकती है, जिसका चरम प्रभाव 2027 में दिखाई देगा।
पूरी दुनिया पर होगा असर
बीते तीन साल पहले ही इतिहास के सबसे गर्म साल रिकॉर्ड किए जा चुके हैं। ऐसे में अल नीनो के कारण तापमान में और बढ़ोतरी होना चिंताजनक है। इसका असर न केवल गर्मी बढ़ाने में होगा, बल्कि इससे दुनिया के कई हिस्सों में सूखा, भारी बारिश और समुद्री जीवन पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। भारत जैसे कृषि प्रधान देशों के लिए यह खबर और भी गंभीर है क्योंकि अल नीनो का सीधा संबंध कमजोर मानसून से भी होता है।
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