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हैती में ‘गैंग वॉर’ से हाहाकार: राजधानी पोर्ट-औ-प्रिंस से जान बचाकर भाग रहे हजारों लोग

Port-au-Prince (Haiti): कैरेबियाई देश हैती इस समय अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। राजधानी पोर्ट-औ-प्रिंस समेत कई प्रमुख इलाकों में हथियारबंद गिरोहों (Gangs) के बीच जारी भीषण गोलीबारी ने कोहराम मचा दिया है। लगातार हो रहे हमलों और असुरक्षा के माहौल

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Port-au-Prince (Haiti): कैरेबियाई देश हैती इस समय अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। राजधानी पोर्ट-औ-प्रिंस समेत कई प्रमुख इलाकों में हथियारबंद गिरोहों (Gangs) के बीच जारी भीषण गोलीबारी ने कोहराम मचा दिया है। लगातार हो रहे हमलों और असुरक्षा के माहौल के कारण हजारों लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर रहे हैं। हैती की गलियां अब केवल हिंसा और भय का प्रतीक बनकर रह गई हैं।

राजधानी के बड़े हिस्से पर गिरोहों का कब्जा

संयुक्त राष्ट्र (UN) और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, पोर्ट-औ-प्रिंस के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से पर अब अपराधियों और हथियारबंद गिरोहों का नियंत्रण है। इन समूहों ने मुख्य सड़कों, बंदरगाहों और सरकारी इमारतों के आसपास अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। इसके परिणामस्वरूप, आम नागरिकों के लिए घर से निकलना भी जानलेवा साबित हो रहा है।

अस्थायी शिविरों में शरण लेने को मजबूर परिवार

हिंसा का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को बिना किसी पूर्व तैयारी या सामान के घर छोड़ना पड़ रहा है। लोग अपने रिश्तेदारों के घरों, चर्चों और स्कूलों में बनाए गए अस्थायी शरण शिविरों में रात गुजार रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि लाखों लोग पहले ही विस्थापित हो चुके हैं और यह मानवीय संकट हर बीतते दिन के साथ गहराता जा रहा है।

ठप पड़ी सामान्य जिंदगी— पुलिस और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बलों के प्रयासों के बावजूद स्थिति नियंत्रण से बाहर है।

  • शिक्षा: हिंसा के डर से अधिकांश स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं।

  • व्यापार: बाजार और व्यावसायिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हैं।

  • यातायात: सड़कों पर गिरोहों के बैरिकेड्स और गोलीबारी के कारण यातायात लगभग बंद है।

मानवीय आपदा की ओर बढ़ता हैती

यह संकट अब केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि एक बड़ी मानवीय आपदा बन चुका है। राहत कार्यों में जुटे संगठनों का कहना है कि गोलीबारी के कारण वे जरूरतमंदों तक भोजन और दवाइयां भी नहीं पहुंचा पा रहे हैं। जब तक अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप और पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था बहाल नहीं होती, तब तक हैतीवासियों के लिए शांति एक दूर का सपना बनी रहेगी।

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