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Riyadh, (Saudi Arabia): सऊदी अरब में अब ऊंट सिर्फ एक जानवर नहीं, बल्कि एक दस्तावेजी पहचान के साथ नजर आएंगे। देश में ऊंटों के पूरे सेक्टर को संगठित और आधुनिक बनाने के लिए सऊदी सरकार ने आधिकारिक रूप से ‘कैमल पासपोर्ट’ लॉन्च कर दिया है। यह कदम सऊदी विजन 2030 की उस बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश की संस्कृति और अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
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सऊदी अरब के उप पर्यावरण, जल और कृषि मंत्री मंसूर अलमुशैती ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि यह पासपोर्ट ऊंटों की पहचान, उनके रिकॉर्ड और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को एक जगह रखने का काम करेगा। मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, यह पासपोर्ट हरे रंग का है, जिस पर देश का राजकीय चिन्ह और ऊंट की सुनहरी आकृति बनी हुई है।
क्यों खास है यह पासपोर्ट?
अरब संस्कृति में ऊंट परिवहन से लेकर परंपराओं तक का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। अनुमान है कि 2024 तक सऊदी में करीब 22 लाख ऊंट हैं। इस नए सिस्टम से सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी और ऊंटों की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता आएगी। इस पासपोर्ट में ऊंट का माइक्रोचिप नंबर, नाम, जन्मतिथि, नस्ल, रंग और लिंग जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज होंगी।
स्वास्थ्य और सुरक्षा पर जोर
इस पासपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषता इसका टीकाकरण रिकॉर्ड है। ऊंट की दाएं और बाएं दोनों तरफ की तस्वीरों के साथ-साथ उसकी मेडिकल हिस्ट्री भी इसमें मौजूद रहेगी। इससे किसी भी संक्रामक बीमारी के फैलने पर स्वास्थ्य विभाग तेजी से कार्रवाई कर सकेगा। मालिकाना हक साबित करना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान होगा, जिससे ऊंट बाजार में होने वाले लेन-देन में भरोसा और मजबूती आएगी।
कुल मिलाकर, सऊदी अरब अपने इस सांस्कृतिक गौरव को अब एक कानूनी और वैज्ञानिक आधार दे रहा है, जिससे ऊंटों के संरक्षण और प्रबंधन में बड़ी मदद मिलेगी।

